आलू के दाम बढऩे से इस बार ‘अन्नदाता’ के चेहरों पर आई रौनक

Edited By swetha,Updated: 24 Feb, 2020 08:50 AM

increase in potato prices

4-5 वर्ष लगातार नुक्सान झेलने के बाद आलू की फसल के दाम इस बार 1100 से लेकर 1300 रुपए तक बढऩे से जहां आलू उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है, वहीं इस बार मौसम के बदलते मिजाज के कारण किसान मायूस भी हैं।

सुल्तानपुर लोधी(सोढी): 4-5 वर्ष लगातार नुक्सान झेलने के बाद आलू की फसल के दाम इस बार 1100 से लेकर 1300 रुपए तक बढ़ने से जहां आलू उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है, वहीं इस बार मौसम के बदलते मिजाज के कारण किसान मायूस भी हैं। किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले जब आलू की पुटाई शुरू हुई तो व्यापारियों ने आलू का भाव 1200 रुपए के करीब लगाया। इस बार आलू के दाम बढऩे से किसानों के चेहरों पर रौणक दिखाई देने लगी। अब जैसे-जैसे व्यापारियों को यह पता चला कि इस बार आलुओं की फसल का क्षेत्रफल कम होने के कारण उत्पादन की काफी कम हुआ है, तो आलू का दाम बढ़ कर 1100 रुपए से 1300 रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। 

पंजाब केसरी टीम ने अलग-अलग गांवों का दौरा किया तो पता चला कि व्यापारियों के साथ मिल कर काम करते हुए कुछ दलालों की ओर से भी काफी हाथ रंगे जा रहे हंै। गत वर्ष भी कुछ दलालों ने किसानों के साथ आलू का दाम कम कर आगे व्यापारियों के साथ अधिक दाम करके मोटी कमाई की थी जिस कारण कई किसान इस बार दलालों को नजदीक नहीं आने दे रहे । इस समय बाजार में  कई दुकानदार किसानों से 10 से 12 रुपए खरीद कर 25 से 30 रुपए किलो के हिसाब से लोगों को बेच रहे हैं। 

आलू के क्षेत्रफल में करीब 7 फीसदी गिरावट आई 
गत 5 वर्षों से आर्थिक संकट में फंसे किसानों ने पूरा रेट न मिलने के कारण आलुओं की बिजाई से मुंह मोड़ लिया। परिणामस्वरूप इस वर्ष पंजाब में आलुओं के क्षेत्रफल में करीब 7 फीसदी गिरावट आई है। झूलस रोग से आलुओं को बचाने के लिए दवाइयों का छिड़काव शुरू करवा दिया। खेतों में से बारिश का पानी निकालने की भी व्यवस्था की जा रही है। इस कारण किसानों का फसल पर खर्च बढ़ रहा है। सबसे अधिक आलू उत्पादक प्रदेश है पंजाब। वर्ष 2015-16 में 92359 हैक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 22,62,404 टन आलुओं का उत्पादन हुआ ।  2016-17 में 97 हजार हैक्टेयर और 2018-19 में 1.03 लाख हैक्टेयर में आलुओं की फसल की बीजी गई थी और 27 लाख मीट्रिक टन आलुओं की फसल हुई थी। वर्ष 2019-20 में 95790 हैक्टेयर में आलुओं की खेती हुई और 23 से 25 लाख मीट्रिक टन फसल हुई। वीरवार को हुए बारिश के कारण किसानों को आलू के ढेर को बारिश से बचाने के लिए तिरपालें आदि डालनी पड़ी। यदि अधिक बारिश होती है तो आलू की पुटाई का काम भी कुछ दिन रुक सकता है।

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