पंजाब में घर बनाने वालों को झटका, भट्ठा उद्योग संकट में, फिर बढ़े ईंटों के दाम!

Edited By Urmila,Updated: 04 Apr, 2026 11:14 AM

setback for homebuilders in punjab

खन्ना में लुधियाना और फतेहगढ़ साहिब जिलों के भट्ठा मालिकों की हुई मीटिंग के बाद पंजाब में ईंटों के रेट एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं।

खन्ना (कमल) : खन्ना में लुधियाना और फतेहगढ़ साहिब जिलों के भट्ठा मालिकों की हुई मीटिंग के बाद पंजाब में ईंटों के रेट एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं। मीटिंग दौरान फैसला किया गया कि अब ईंट 8800 रुपए प्रति हजार के हिसाब से बेची जाएंगी। इस फैसले के पीछे कोयले की लगातार बढ़ रही कीमतों को मुख्य कारण बताया गया है।

भट्ठा मालिक एसोसिएशन जिला लुधियाना के अध्यक्ष अश्वनी कुमार शर्मा और खन्ना इकाई अध्यक्ष हरपाल सिंह औजला ने कहा कि इस समय पर भट्ठा उद्योग गंभीर संकट में से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 50 प्रतिशत भट्ठा पहले ही बंद पड़े हैं और जो चल रहे हैं, वह भी घाटे में काम कर रहे हैं। कोयले की कीमत अब 20 हजार रुपए प्रति टन से ज्यादा हो चुकी है, जिससे उत्पादन लागत बहुत बढ़ गई है।

House Construction

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े कॉर्पोरेट घराने अपनी मनमर्जी से रेट तय कर रहे हैं और छोटे भट्ठा मालिकों पर यह कीमतें थोपी जा रही हैं। इस कारण उद्योग चलाना मुश्किल होता जा रहा है। पंजाब में भट्ठा उद्योग की बुरी हालत के कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण ईंधन की बढ़ती कीमत है। पहले कोयला 10,500 से 11,500 रुपए प्रति टन मिलता था, परंतु अब यह लगभग दोगुना हो गया है। इसके अलावा जी.एस.टी. 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने से भी मालिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

सरकार द्वारा भट्ठों में 20 से 50 प्रतिशत तक धान की पराली उपयोग करने के हुक्म भी दिए गए हैं। भट्ठा मालिकों का कहना है कि इससे ईंट की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में भी दिक्कतें आ रही हैं।

इन समस्याओं के कारण कई भट्ठा मालिकों ने इस बार अपने भट्ठे लम्बे समय के लिए बंद करने का फैसला लिया है। इस पूरे संकट का सीधा प्रभाव निर्माण क्षेत्र और आम लोगों पर पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही ईंटों के रेट में 800 से 1200 रुपए प्रति हजार तक वृद्धि हुई है। इससे घर बनाने वालों और रियल एस्टेट सैक्टर को बड़ा झटका लग रहा है। भट्ठा मालिकों ने सरकार से मांग की है कि कोयले की कीमतों को काबू किया जाए और नीतियों में राहत दी जाए, जिससे इस उद्योग को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!