Edited By Urmila,Updated: 13 Mar, 2026 10:49 AM

महानगर के 'गलाडा' (GLADA) में जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
लुधियाना (राज): महानगर के 'गलाडा' (GLADA) में जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाजों ने दफ्तर के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर न केवल फर्जी अलॉटमेंट लेटर तैयार किए, बल्कि लाखों रुपए की बैंक रसीदें भी जाली बना डालीं। इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद गलाडा के मिल्क अफसर (Estate Officer) की शिकायत पर थाना सराभा नगर की पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार मामले का खुलासा तब हुआ जब गलाडा दफ्तर को शिकायत नंबर 1080 (दिनांक 10.03.2026) प्राप्त हुई। जांच में पाया गया कि अज्ञात व्यक्ति ने मकान नंबर 273, एम.आई.जी. फेज-3, दुगरी को महिंदर सिंह के नाम पर अलॉट दिखाने के लिए एक फर्जी पत्र (नंबर 7184, दिनांक 20.11.1998) तैयार किया था। जब विभाग ने अपने रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि इस प्रॉपर्टी से संबंधित कोई भी रकम गलाडा के खाते में जमा ही नहीं हुई थी।
हैरानी की बात यह है कि जालसाजों ने विभाग की आंख में धूल झोंकने के लिए रसीद बुक नंबर 1305 और रसीद नंबर 60 (दिनांक 01.12.1998) की जाली कॉपियां फाइल में लगा दी थीं। इनमें 3,00,000 रुपए और 1,34,000 रुपए (कुल 4.34 लाख रुपए) के ड्राफ्ट जमा होने का दावा किया गया था। लेखा शाखा (Accounts Branch) की रिपोर्ट में साफ हुआ कि गलाडा के बैंक खाते में ऐसी कोई राशि कभी आई ही नहीं। इतना ही नहीं, मकान के कब्जे से जुड़े दस्तावेज भी पूरी तरह फर्जी पाए गए।
फिलहाल, गलाडा अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस को शक है कि इस बड़े खेल में विभाग के ही किसी अंदरूनी अधिकारी या पुराने कर्मचारी का हाथ हो सकता है, जिसने दशकों पुराने रिकॉर्ड में सेंध लगाई। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है जिन्होंने जाली कागजों के दम पर बेशकीमती संपत्तियों पर कुंडली मार रखी है।
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