RTI के जवाब ने केंद्र के झूठ का पर्दाफाश किया: CM कैप्टन

Edited By Vatika,Updated: 21 Jan, 2021 10:53 AM

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पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह ने कहा है कि आर.टी.आई. के जवाब ने खेती सुधारों संबंधी उच्च-स्तरीय कमेटी द्वारा मंजूरी देने

चंडीगढ़(अश्वनी): पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह ने कहा है कि आर.टी.आई. के जवाब ने खेती सुधारों संबंधी उच्च-स्तरीय कमेटी द्वारा मंजूरी देने संबंधी केंद्र सरकार के दावे का पर्दाफाश कर दिया है। अब स्पष्ट हो चुका है कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी द्वारा भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारों पर झूठा प्रचार किया जा रहा है। इससे दोनों पार्टियां मिलकर किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों मुताबिक योजना आयोग ने सूचना के अधिकार एक्ट के तहत एक जवाब में कहा कि जून, 2020 में संसद में कृषि कानूनों को नीति आयोग की गवर्निंग कौंसिल ने मुख्यमंत्रियों पर आधारित कमेटी की रिपोर्ट का मूल्यांकन किए बिना ही लाया गया। केंद्र सरकार के दावों के उलट अकाली दल और आम आदमी पार्टी दोनों शर्मनाक ढंग से प्रचार करती रहीं जिससे भाजपा के किसान विरोधी एजैंडे को और आगे बढ़ाया जा सके। जिक्रयोग्य है कि केंद्रीय राज्य खाद्य मंत्री दानवे राओसाहब दादाराओ ने लोकसभा में दावा किया था कि जरूरी वस्तुएं (संशोधन) बिल को कमेटी ने मंजूरी दी थी जिसे कै. अमरेंद्र सिंह स्पष्ट तौर पर रद्द कर चुके हैं और अब आर.टी.आई. के जवाब में भी यह गलत सिद्ध हो चुका है।

कै. अमरेंद्र ने कहा कि आर.टी.आई. के जवाब में भी सिद्ध हो चुका है कि कमेटी की रिपोर्ट अभी तक नीति आयोग की गवॄनग कौंसिल के सामने भी नहीं रखी गई। एक बार रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पता लग जाएगा कि कमेटी की मीटिंगों में किसने क्या कहा था। पंजाब पहली मीटिंग का हिस्सा भी नहीं था, जबकि दूसरी मीटिंग में मनप्रीत बादल ने भाग लिया, जिसमें कुछ वित्तीय मामले ही विचारे गए। तीसरी मीटिंग में सचिव स्तर के अधिकारी ही शामिल हुए। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की तरफ से झूठे प्रचार के आधार पर राहुल गांधी को सवाल करने के लिए आड़े हाथ लेते उन्होंने कहा कि अकाली नेता की बेशर्मी की हद देखो कि आर.टी.आई. के जवाब के बाद भी लगातार झूठ बोलती रहीं और मीडिया में बड़े स्तर पर प्रकाशित होता रहा। आर.टी.आई. बारे मीडिया रिपोर्टों से दो से अधिक दिनों बाद भी हरसिमरत ने कै. अमरेंद्र पर कमेटी का हिस्सा होने के नाते कृषि कानूनों बारे सहमत होने का दोष लगाया।
 

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