पंजाब के स्कूलों के लिए बड़ी खबर, आज आखिरी मौका

Edited By Urmila,Updated: 31 Jul, 2026 02:41 PM

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जिले के कुल 819 निजी स्कूलों में से सिर्फ 577 स्कूलों ने ही अपना डेटा अपलोड किया है, जबकि 242 स्कूल अभी तक इस प्रक्रिया को अनदेखा कर रहे हैं।

अमृतसर (दलजीत) : अमृतसर में निजी स्कूलों की फीस और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा फीस रैगुलेटरी बॉडी के तहत सभी मान्यता प्राप्त और एफिलिएटेड स्कूलों को 31 जुलाई तक अपना वित्तीय और फीस संबंधी डेटा सरकारी पोर्टल पर अपलोड करने के सख्त आदेश जारी किए गए थे लेकिन निर्धारित समयसीमा के बावजूद कई स्कूल इस प्रक्रिया से पीछे हैं, जिससे मामला अब टकराव में बदलता नजर आ रहा है।

जानकारी के अनुसार जिले के कुल 819 निजी स्कूलों में से सिर्फ 577 स्कूलों ने ही अपना डेटा अपलोड किया है, जबकि 242 स्कूल अभी तक इस प्रक्रिया को अनदेखा कर रहे हैं। आंकड़ों के हिसाब से लगभग 71 प्रतिशत स्कूलों ने आदेशों का पालन किया है लेकिन बाकी स्कूल शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो स्कूल निर्धारित समयसीमा तक डेटा अपलोड नहीं करेंगे उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि मान्यता रद्द करने के लिए भी उच्चाधिकारियों को सिफारिश की जा सकती है। जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) कंवलजीत सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी मुहैया करवाना अनिवार्य है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रासा का विरोध, हाईकोर्ट में दी चुनौती

दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों की संस्था 'रासा' ने इस पूरे मामले को 'तानाशाही' करार देते हुए खुला विरोध शुरू कर दिया है। रासा के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए जा रहे नियम बिना उचित सलाह-मशवरे के बनाए गए हैं जो निजी स्कूलों पर बेवजह बोझ डाल रहे हैं। रासा द्वारा इस मामले में माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की गई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि जब तक अदालत द्वारा कोई ठोस फैसला नहीं आ जाता वह अपनी स्थिति पर कायम रहेगी और डेटा अपलोड करने के मामले में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।

फीस रैगुलेटरी बॉडी का फोकस: हर खर्च की होगी जांच

फीस रैगुलेटरी बॉडी द्वारा बनाए गए मानकों के अनुसार स्कूलों को ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस, डिवैल्पमैंट चार्ज, सालाना खर्च और अन्य सभी आर्थिक विवरण पोर्टल पर अपलोड करने अनिवार्य हैं। इस डैटा के आधार पर विभाग द्वारा स्कूलों के फीस ढांचे की जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करने के आदेश भी जारी हो सकते हैं।

31 जुलाई के बाद सख्त कदम संभव

अब सभी की निगाहें 31 जुलाई की डैडलाइन पर टिकी हुई हैं। यदि बाकी रह गए स्कूलों द्वारा भी जल्द डेटा अपलोड नहीं किया जाता तो शिक्षा विभाग द्वारा बड़े स्तर पर कार्रवाई होने की संभावना है। वहीं रासा की हाईकोर्ट में चल रही कार्रवाई भी इस मामले को नया मोड़ दे सकती है।

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