पंजाब में अध्यापकों के लिए नई सिरदर्दी, अब मंडराने लगा ये खतरा

Edited By Kalash,Updated: 01 Apr, 2026 11:12 AM

punjab school teacher

पंजाब के सरकारी स्कूलों के अध्यापक इन दिनों दोहरी और तिहरी ड्यूटियों के बोझ तले दबे हुए हैं।

लुधियाना (विक्की): पंजाब के सरकारी स्कूलों के अध्यापक इन दिनों दोहरी और तिहरी ड्यूटियों के बोझ तले दबे हुए हैं। एक ओर शिक्षा विभाग अध्यापकों की ड्यूटियां पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं की आंसर शीट्स की चैकिंग के लिए लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी स्कूली अध्यापकों को सरकार की विभिन्न स्कीमों की ड्यूटी बजाने के लिए भेज रहे हैं। यही बस नहीं चुनाव अधिकारियों द्वारा कई अध्यापकों को तो चुनावी कार्य निपटाने के लिए बुलाने के लिए बार-बार उनके स्कूलों में पत्र भेजे जा रहे है। हालात यह बन गए हैं कि आखिर डी.ई.ओ. को डी.सी. को पत्र लिखना पड़ा कि जिन अध्यापकों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षाओं की चैकिंग के लिए मार्किंग सैंटर में लगाई गई है, को किसी अन्य कार्य हेतु न बुलाया जाए अन्यथा परीक्षाओं का काम देर होने के वजह से रिजल्ट भी देर हो सकते हैं। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के चुनाव अधिकारियों के बीच अध्यापकों की ड्यूटियों को लेकर एक तरह की 'कोल्ड वार' शुरू हो गई है। 

डी.ई.ओ. की डी.सी. को रिक्वैस्ट, रिटर्निंग अधिकारियों को ऐसा करने से रोकें

जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी) डिम्पल मदान ने डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर अध्यापकों को प्रशासनिक और चुनावी ड्यूटियों से छूट देने की रिक्वैस्ट की है। डी.ई.ओ. का कहना है कि बोर्ड पेपरों की मार्किंग की प्रक्रिया पूरी तरह समय-बद्ध है ताकि नतीजे समय पर घोषित किए जा सकें और विद्यार्थियों का अगला एकेडमिक सैशन प्रभावित न हो। 

अध्यापन छोड़ प्रशासनिक कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे कई अध्यापक 

इस विवाद के बीच कुछ स्कूल प्रमुखों ने अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ अध्यापक तो पूरे साल स्कूल में कम और डी.सी. व एस.डी.एम. कार्यालय में सेवा पर अधिक रहते हैं। स्कूल प्रमुखों ने आरोप लगाया कि डी.सी. कार्यालय के पास पर्याप्त क्लैरिकल स्टाफ मौजूद है, लेकिन वह काम करने को राजी नहीं है और विद्यार्थियों के भविष्य को ताक पर रखते हुए अध्यापकों को इस काम में झोंक दिया जाता है।

प्रशासन पर सवाल : 'सिर्फ अध्यापकों की ही चुनावी ड्यूटी क्यों? 

विशेषज्ञों और स्कूल प्रमुखों का सवाल है कि आखिर हर काम के लिए अध्यापकों को ही ड्यूटी पर क्यों लगाया जाता है? जब स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग, नए दाखिलों की प्रक्रिया और नए सैशन की शुरूआत का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है तो प्रशासन अध्यापकों को गैर-अध्यापन कार्यों में क्यों लगा रहा है?

आम लोगों और अध्यापकों में रोष 

अध्यापकों और आम लोगों का कहना है कि सरकार को चुनाव और अन्य सर्वे के कामों के लिए एक अलग विभाग बनाना चाहिए। अगर अध्यापक सारा बी.एल.ओ. ड्यूटी और जनगणना जैसे कामों में ही उलझे रहेंगे, तो वे विद्यार्थियों को कब पढ़ाएंगे? विभाग चाहता है कि 25 अप्रैल तक मार्किंग का काम पूरा हो जाए, लेकिन प्रशासनिक ड्यूटियों के जंजाल ने इस लक्ष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

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