Edited By Kalash,Updated: 10 Jan, 2026 06:23 PM

पंजाब सरकार ने अचल संपत्ति (प्रॉपर्टी) की खरीद–फरोख्त में हो रहे बड़े नकद लेन–देन पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।
जालंधर (चोपड़ा): पंजाब सरकार ने अचल संपत्ति (प्रॉपर्टी) की खरीद–फरोख्त में हो रहे बड़े नकद लेन–देन पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। इंस्पैक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन, पंजाब की ओर से सभी रजिस्ट्रार कम डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि किसी भी संपत्ति के सौदे में 2 लाख रुपए या उससे अधिक की नकद (कैश) ट्रांजैक्शन होती है तो उसकी पूरी रिपोर्ट तुरंत राज्य मुख्यालय भेजी जाए। राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों को जारी पत्र में बताया गया है कि यह रिपोर्ट आगे डायरैक्टर इंटेलिजैंस एंड क्राइम इन्वैस्टिगेशन, चंडीगढ़ को भेजी जाएगी। इस संदर्भ में आज यह निर्देश दिया गया है कि राज्य स्तर पर इस तरह के सभी मामलों की निगरानी की जाएगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रॉपर्टी सौदों में काले धन का इस्तेमाल न हो और टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके।
एक वरिष्ठ रैवेन्यू अधिकारी का कहना है कि सरकार का साफ कहना है कि यह आदेश जनता को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने के लिए है। डायरेक्टर इंटेलिजेंस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से पूरे राज्य में संदिग्ध संपत्ति सौदों पर नजर रखी जाएगी। इससे न केवल ब्लैक मनी पर रोक लगेगी, बल्कि ड्रग मनी, हवाला और संगठित अपराध से जुड़े धन के निवेश को भी पकड़ा जा सकेगा।
सरकार का ब्लैक मनी पर सीधा वार
पंजाब में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि जमीन-जायदाद की खरीद फरोख्त में बड़ी मात्रा में काला धन खपाया जाता है। रजिस्ट्रेशन के समय अक्सर सौदे की आधिकारिक कीमत कम दिखाई जाती है, जबकि वास्तविक भुगतान का बड़ा हिस्सा नकद में लिया या दिया जाता है। अब 2 लाख या उससे अधिक की नकद राशि पर रिपोर्टिंग अनिवार्य होने से ऐसे सौदों पर सीधा असर पड़ेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और अवैध संपत्ति निवेश को रोकने में मदद करेगी। डायरेक्टर इंटेलिजेंस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर संदिग्ध लेनदेन की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर एफ.आई.आर. या आयकर विभाग को भी सूचित किया जा सकता है।
रजिस्ट्रेशन दफ्तरों पर बड़ी जिम्मेदारी
इस आदेश के बाद राज्य के सभी रजिस्ट्रार और सब–रजिस्ट्रार कार्यालयों की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। उन्हें अब सिर्फ दस्तावेज दर्ज ही नहीं करने होंगे, बल्कि यह भी देखना होगा कि कहीं किसी सौदे में 2 लाख या उससे ज्यादा की नकद रकम तो शामिल नहीं है। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उसकी पूरी डिटेल तुरंत इंस्पैक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन के दफ्तर को भेजनी होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश को “अति आवश्यक” मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि लापरवाही या जानकारी छिपाने की स्थिति में उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
आम जनता की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जहां एक ओर सरकार इस कदम को ब्लैक मनी पर रोक लगाने की दिशा में जरूरी बता रही है, वहीं आम लोगों के लिए इससे कुछ व्यावहारिक मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी बहुत से लोग जमीन या मकान की खरीद–फरोख्त में आंशिक भुगतान नकद में करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग सुविधाएं या डिजिटल ट्रांजैक्शन की पहुंच सीमित होती है। अब यदि कोई व्यक्ति 2 लाख रुपए या उससे अधिक नकद में देता या लेता है, तो उसकी जानकारी सरकारी एजैंसियों तक पहुंच जाएगी। इससे लोगों को अपनी आय और भुगतान का पूरा हिसाब देना पड़ेगा। जो लोग ईमानदारी से सौदा करते हैं, उन्हें तो परेशानी नहीं होगी, लेकिन जिन सौदों में पहले से ही अनियमितताएं हैं, उनके लिए जोखिम काफी बढ़ जाएगा।
प्रॉपर्टी बाजार पर पर भी पड़ेगा इस आदेश का असर
रियल एस्टेट से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता तो बढ़ेगी, लेकिन शुरुआती दौर में सौदों की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। माना जाता है कि बहुत से खरीदार व विक्रेता अभी भी सौदे के मुताबिक कुछ हद तक नकद भुगतान को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इससे टैक्स कम देना पड़ता है। अब उन्हें बैंकिंग चैनल के जरिए पूरा भुगतान करना होगा, जिससे स्टांप ड्यूटी और आयकर दोनों बढ़ सकते हैं।
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