Edited By Urmila,Updated: 27 Feb, 2026 04:18 PM

इस बार फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो गेहूं की फसल के लिए चिंताजनक है।
जालंधर (माही): इस बार फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो गेहूं की फसल के लिए चिंताजनक है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो फसल की पैदावार के घटने का खतरा है। खासकर गर्मी बढ़ने से झाड़ कम होने और दानों के सिकुड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
चीफ एग्रीकल्चर अधिकारी जसविंदर सिंह ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल टिलरिंग से बूटिंग स्टेज की ओर बढ़ रही है। यह अवस्था तापमान के प्रति संवेदनशील होती है। यदि दिन का तापमान लगातार अधिक रहता है और रात में भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती तो पौधों की जैविक क्रियाएं प्रभावित होती हैं। इससे पौधे की ऊर्जा दाने के विकास के बजाय जीवित रहने में खर्च होने लगती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
समय पर स्प्रे और नमी बनाए रखना जरूरी
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे पोटाशियम और नाइट्रेट का घोल बनाकर फसल पर स्प्रे करें। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे तापमान के दबाव को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं। पोटाशियम पौधों में पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जबकि नाइट्रेट उनको मजबूती देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ निर्धारित मात्रा में पोटाशियम नाइट्रेट का 2 प्रतिशत घोल तैयार कर सुबह या शाम के समय छिड़काव करें। तेज धूप के समय स्प्रे करने से दवा का असर कम हो सकता है। साथ ही खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि सिंचाई की आवश्यकता हो तो हल्की सिंचाई कर मिट्टी में नमी बनाए रखें, ताकि पौधों की जड़ें सक्रिय रहें और पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से हो सके।
चीफ एग्रीकल्चर अधिकारी जसविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि किसान इस समय लापरवाही बरतते हैं तो झाड़ कम होने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन घट सकता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मौसम के उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
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