सरकारी बसों में महिलाओं के साथ अपमान और लापरवाही का मामला भड़का, उठे गंभीर सवाल

Edited By Kalash,Updated: 02 Apr, 2026 05:56 PM

punjab free government bus service

पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक राहत और आवागमन में सुविधा प्रदान करने के नाम पर सरकारी बसों में मुफ्त सफर की योजना लागू की गई है

पायल (विनायक): पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक राहत और आवागमन में सुविधा प्रदान करने के नाम पर सरकारी बसों में मुफ्त सफर की योजना लागू की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बस अड्डों पर अपर्याप्त प्रबंध, बसों की कमी, स्टाफ की लापरवाही और महिलाओं के साथ हो रहे अपमानजनक व्यवहार के कारण यह योजना अब बड़े विवाद का विषय बनती जा रही है। ताजा मामला पटियाला बस अड्डे पर घटी एक दिल दहला देने वाली घटना के साथ सामने आया है, जिसने न सिर्फ बस सेवा की प्रबंधन संबंधी खामियों को उजागर किया है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

दो घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिली सुविधा

पायल के सरहंदी गेट स्थित श्री शिव मंदिर की सेवेदार बहन इंदरा जी ने जानकारी देते हुए बताया कि वह अपनी दो नाबालिग पोतियों के साथ पटियाला स्थित माता काली के दर्शन करके वापस आ रही थीं। पटियाला बस अड्डे पर वह करीब दो घंटे तक अन्य सैकड़ों महिलाओं सहित बस का इंतजार करती रहीं, लेकिन बसों के आने या जाने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बताया कि वहां मौजूद महिलाओं की संख्या 300 से 400 के करीब थी, लेकिन न कोई टाइम-टेबल था और न ही किसी अधिकारी द्वारा कोई सही दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे।

चलती बस से छलांग, मौके पर मची दहशत

बहन इंदरा जी के अनुसार जब बस आई तो भीड़ बेहद ज्यादा थी और बस का पिछला दरवाजा बंद रखा गया। उनकी दोनों पोतियां किसी तरह बस में चढ़ गईं, लेकिन वह स्वयं उम्र के तकाजे के कारण बस में चढ़ नहीं सकीं। इस दौरान ड्राइवर ने बस चला दी, जबकि बच्चियां रोते हुए बस रोकने की गुहार लगाती रहीं। कंडक्टर द्वारा कोई ध्यान न देने के कारण घबराहट में एक पोती ने चलती बस से छलांग लगा दी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। बहन इंदरा जी को मजबूर होकर बस के आगे खड़े होकर विरोध करना पड़ा, जिसके बाद ही बस रोकी गई।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

बहन इंदरा जी ने बताया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि उनके साथ तीन बार इस तरह की लापरवाही हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली की नाकामी है, जिसके कारण महिलाओं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार के आरोप

मामले को और गंभीर बनाते हुए बहन इंदरा जी ने आरोप लगाया कि बस अड्डे पर प्राइवेट बसों के कर्मचारी मुफ्त सफर करने वाली महिलाओं पर तीखी और अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। उनके शब्दों के अनुसार, कर्मचारी अक्सर कहते हैं कि “ये तो थक-हार कर खुद ही बैठ जाएंगी”, जो कि हर महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बस कंडक्टर अक्सर कहते हैं कि यह बस पटियाला से सीधी जालंधर जाकर ही रुकेगी और बीच में किसी भी स्थान पर स्टॉप नहीं करेगी, जिसके कारण रास्ते में (खन्ना, लुधियाना) उतरने वाली महिलाओं को न सिर्फ परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि उन्हें बेइज्जती भी सहनी पड़ती है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी पोती की जान बच जाना सिर्फ किस्मत की बात थी, नहीं तो बड़ा हादसा भी हो सकता था। यह मामला सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस महिला से जुड़ा हुआ है जो रोजाना सरकारी बसों में सफर करती है।

योजना के मकसद पर उठे गंभीर सवाल

जनता में यह धारणा तेजी से बन रही है कि कई स्थानों पर बस ड्राइवर महिलाओं को देखकर बस स्टॉप से दूर बस रोकते हैं या जल्दी से बस आगे ले जाते हैं, ताकि वे चढ़ न सकें। इस हड़बड़ी में महिलाओं को दौड़कर बस तक पहुंचना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा बनता है और कई बार उन्हें अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस तरह की घटनाओं के कारण मुफ्त सफर योजना के असल मकसद पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। 

मुफ्त सफर योजना बनी महिलाओं की इज्जत के लिए चुनौती 

बहन इंदरा जी ने कहा कि संविधान महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार देता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह योजना उनके लिए अपमान और परेशानी का कारण बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक सफर नहीं दे सकती, तो ऐसी योजनाएं लागू करना सिर्फ राजनीतिक दिखावा है।

योजना तुरंत बंद करने की मांग

बहन इंदरा जी ने सरकार से पुरजोर मांग की कि महिलाओं की जान और इज्जत से जुड़ी इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और यदि सुधार संभव नहीं, तो इस योजना को तुरंत बंद किया जाए।

इंजी. जगदेव सिंह बोपाराय द्वारा कड़ी निंदा

इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रख्यात समाजसेवी इंजीनियर जगदेव सिंह बोपाराय ने कहा कि यदि महिलाओं को सुविधा देने के नाम पर उन्हें खतरे और अपमान का सामना करना पड़े, तो यह सरकार और प्रशासन की बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

सरकारी प्रणाली पर भरोसा घटने का खतरा

इंजी. बोपाराय ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो लोगों का सरकारी प्रणाली पर भरोसा घटेगा, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति होगी। उन्होंने बस अड्डों पर निगरानी प्रणाली मजबूत करने और महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर पूर्व सरपंच मनदीप सिंह चापड़ा (आढ़ती), जत्थेदार बेअंत सिंह पंधेर खेड़ी, मनप्रीत सिंह बिल्ला घुडाणी, सुनील दीक्षित, विजय कुमार नेता और अन्य नेता भी मौजूद थे।

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