लुधियाना में प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल, रिहायशी इलाकों में फिर शुरू हुई अवैध गतिविधियां

Edited By VANSH Sharma,Updated: 25 Mar, 2026 07:42 PM

questions raised over administration s action in ludhiana

शहर के बसंत नगर और शिवपुरी क्षेत्र में रिहायशी इलाकों के बीच संचालित अवैध कबाड़ गोदाम एक बार फिर चर्चा में हैं।

लुधियाना (गणेश): शहर के बसंत नगर और शिवपुरी क्षेत्र में रिहायशी इलाकों के बीच संचालित अवैध कबाड़ गोदाम एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब तीन महीने पहले लगी भीषण आग की घटना के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अब दोबारा गोदामों में काम शुरू होने से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

भीषण आग पर 40 दमकल गाड़ियों ने पाया था काबू

करीब तीन महीने पहले बसंत नगर की एक गली में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया था। आग इतनी भयावह थी कि उस पर काबू पाने के लिए करीब 40 दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाना पड़ा। कई घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। इस दौरान चार इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी।

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रिहायशी मकानों में चल रहे अवैध गोदाम

सूत्रों के अनुसार, इलाके में कई मकानों को अवैध रूप से कबाड़ गोदामों में तब्दील कर दिया गया है। इन स्थानों पर प्लास्टिक, लोहे और अन्य ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किया जा रहा है, जिससे आग लगने का खतरा लगातार बना रहता है।

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तीन माह बाद फिर शुरू हुआ काम

आग की घटना के बाद गोदाम संचालकों ने काम बंद करने की बात कही थी, लेकिन अब फिर से गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों में रोष और भय दोनों बढ़ गए हैं।

आम आदमी पार्टी के विधायक और पार्षद पर लगे आरोप

सूत्रों के अनुसार, इन अवैध गोदामों के संचालन को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायक और पार्षद पर संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस समय-समय पर केवल औपचारिक कार्रवाई करती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

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पहले भी हो चुका हादसा

सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले एक कंप्रेसर फटने से एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में हुआ, जहां उसकी तीन उंगलियां काटनी पड़ीं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों में कोई सुधार नहीं किया गया।

मुआवजे में असमानता से असंतोष

आगजनी की घटना के बाद प्रशासन द्वारा एक प्रभावित व्यक्ति को करीब डेढ़ लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि अन्य प्रभावितों को कोई राहत नहीं मिली। इसे लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है।

नियमों की अनदेखी, प्रशासन मौन

नगर निगम और फायर सेफ्टी के नियमों के अनुसार रिहायशी इलाकों में इस प्रकार की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं, बावजूद इसके ये गोदाम खुलेआम संचालित हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। इलाके के निवासियों का कहना है कि वे लगातार असुरक्षा की भावना में जी रहे हैं और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध गोदामों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

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