Punjab: करोड़ों की जमीन घोटाले पर कोर्ट का सख्त फैसला, पटवारी और कानूनगो समेत 6 लोग दोषी

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 01 Jun, 2026 07:36 PM

court delivers strict verdict in multi crore land scam in ludhiana

लुधियाना की विशेष अदालत ने सरकारी अधिग्रहित भूमि की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्री करने के बहुचर्चित मामले में 6 आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत ने 29 मई 2026...

लुधियाना, (मेहरा) : लुधियाना की विशेष अदालत ने सरकारी अधिग्रहित भूमि की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्री करने के बहुचर्चित मामले में 6 आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत ने 29 मई 2026 को आरोपियों को दोषी ठहराया था तथा 30 मई को सजा का आदेश सुनाया।  दोषियों में अमरीक सिंह, प्रीतपाल कौर, जगदीश कौर, तत्कालीन पटवारी जस्करण सिंह, तत्कालीन कानूनगो परमजीत सिंह तथा पटवारी गुरप्रीत सिंह शामिल हैं। यह मामला विजिलेंस ब्यूरो, लुधियाना द्वारा दर्ज एफआईआर नंबर 06 दिनांक 5 जुलाई 2017 से संबंधित है, जिसमें आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।  

अदालत के अनुसार संबंधित भूमि का अधिग्रहण उद्योग विभाग, पंजाब द्वारा किया जा चुका था। भूमि का मुआवजा मूल मालिक दलजीत सिंह को दिया जा चुका था तथा विभाग ने भूमि का कब्जा भी ले लिया था। इसके बावजूद आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर फर्जी इंतकाल (Mutation) और जमाबंदी तैयार की तथा उनके आधार पर भूमि की अवैध रूप से तीन अलग-अलग बिक्री विलेख (Sale Deeds) के माध्यम से बिक्री कर दी।  

सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े इस गंभीर अपराध में किसी प्रकार की नरमी बरतने की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने सभी दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत चार से पांच वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।  

पूर्व पटवारी जस्करण सिंह, पूर्व कानूनगो परमजीत सिंह तथा पटवारी गुरप्रीत सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) सहपठित धारा 13(2) के तहत भी चार वर्ष के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई गई।  अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही जांच एवं मुकदमे के दौरान हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।  

यह फैसला सरकारी भूमि से जुड़े धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के लिए कड़ा संदेश गया है।

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