लुधियाना में शराब सिंडिकेट का खेल उजागर, सवालों के घेरे में एक्साइज विभाग!

Edited By Urmila,Updated: 01 Jun, 2026 02:29 PM

syndicate rule in the liquor business

महानगर लुधियाना में शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर एक्साइज विभाग सवालों के घेरे में आ गया है।

लुधियाना (सेठी) : महानगर लुधियाना में शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर एक्साइज विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के लाइसेंसधारी शराब ठेकेदारों के बीच वर्षों से एक कथित "मैरिज पैलेस सिंडिकेट" संचालित होता रहा है, जिसके तहत विवाह समारोहों, पार्टियों और अन्य आयोजनों में सप्लाई की जाने वाली शराब के दाम आपसी सहमति से तय किए जाते थे। आरोप है कि इन आयोजनों के लिए बेची जाने वाली शराब की कीमतें सामान्य ठेकों पर उपलब्ध शराब की तुलना में असाधारण रूप से अधिक रखी जाती थीं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था और कुछ चुनिंदा लोगों को भारी आर्थिक लाभ पहुंचता था।
सूत्रों का दावा है कि यह सिंडिकेट केवल ठेकेदारों की आपसी सहमति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे कुछ एक्साइज अधिकारियों की कथित सहमति और संरक्षण भी प्राप्त था। अब इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार का एक नया पहलू सामने आने की चर्चा है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

1.5 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी से करोड़ों का खेल

जानकारी के अनुसार सिंडिकेट में शामिल एक लाइसेंसधारी शराब ठेकेदार को अन्य ठेकेदारों की तुलना में लगभग 1.5 प्रतिशत अधिक हिस्सेदारी दिलवाई गई थी। आरोप है कि यह अतिरिक्त हिस्सा एक प्रभावशाली एक्साइज अधिकारी वेस्ट के हस्तक्षेप के बाद तय किया गया था। इसके चलते अन्य ठेकेदारों के हिस्से में कमी आई और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारी लगातार अन्य ठेकेदारों पर दबाव बनाता रहा ताकि उक्त व्यवस्था पर कोई सवाल न उठाए जाएं। चर्चा यह भी है कि अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के पीछे केवल कारोबारी हित नहीं बल्कि कथित कमीशनखोरी का खेल भी छिपा हुआ था। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस अतिरिक्त हिस्सेदारी में संबंधित अधिकारी का भी हिस्सा तय था, जिसके कारण पूरे मामले को विभागीय संरक्षण मिलता रहा।

शराब कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि मैरिज पैलेसों में शराब की बिक्री का कारोबार करोड़ों रुपये का है। ऐसे में मात्र 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी भी करोड़ों रुपये की राशि बन सकती है। इसी कारण अब मांग उठ रही है कि यह पता लगाया जाए कि यह अतिरिक्त लाभ वास्तव में किसे मिला और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।

अवैध सब-वेंड्स पर भी उठ रहे सवाल

शहर में अवैध शराब बिक्री को लेकर भी लगातार चर्चाएं चल रही हैं। आरोप है कि आज भी कई स्थानों पर कथित रूप से अवैध सब-वेंड्स संचालित हो रहे हैं और इन्हें विभागीय संरक्षण प्राप्त है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं बल्कि आबकारी कानूनों की खुली अवहेलना भी माना जाएगा।

स्थानीय व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि लाइसेंस शर्तों के विपरीत अवैध बिक्री केंद्र संचालित हो रहे हैं तो उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए तथा यह भी जांच होनी चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की।

"राजस्व से अधिक रिश्वत वसूली" की चर्चाएं

सूत्रों के अनुसार शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा कथित रूप से रिश्वत के माध्यम से बड़ी रकम एकत्रित की जा रही है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि शराब कारोबार से जुड़े विभिन्न कार्यों, निरीक्षणों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित अवैध वसूली का एक समानांतर तंत्र विकसित हो चुका है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी शिकायत

जानकारी के अनुसार संबंधित एक्साइज अधिकारी के खिलाफ विस्तृत शिकायत तैयार की जा रही है, जिसे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, आबकारी आयुक्त तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके साथ ही पूरे मामले की विजिलेंस जांच कराने की मांग भी उठाई जा रही है ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित अधिकारी की लुधियाना में तैनाती के दौरान अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों, निवेशों तथा आर्थिक लेन-देन की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए। आरोप है कि अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिसकी वित्तीय जांच आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच

शराब कारोबार से जुड़े इस कथित सिंडिकेट, अतिरिक्त हिस्सेदारी के विवाद, अवैध सब-वेंड्स के संचालन तथा अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग और सरकार इन आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच करवाकर सच्चाई जनता के सामने लाएंगे या नहीं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल विभागीय भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे सरकारी राजस्व, प्रशासनिक पारदर्शिता और आबकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन आरोपों पर एक्साइज विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग की ओर से कोई पक्ष या स्पष्टीकरण आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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