Edited By Subhash Kapoor,Updated: 07 Jan, 2026 08:54 PM

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ के नेतृत्व में पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन (PRIA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब...
दिल्ली/चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ के नेतृत्व में पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन (PRIA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के चावल मिलिंग उद्योग से जुड़े गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया, विशेष रूप से फोर्टिफाइड राइस कर्नल (ऍफ़आरके) नीति और राज्य में गहरे भंडारण संकट के समाधान पर जोर दिया।
PRIA के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा FRK नीति पर गहरी चिंता व्यक्त की। एसोसिएशन ने मांग की कि कम से कम मौजूदा वर्ष के लिए फोर्टिफाइड चावल की डिलीवरी को स्थगित किया जाए, यह बताते हुए कि केंद्र सरकार के पास पहले से ही देशभर के गोदामों में फोर्टिफाइड चावल का भारी भंडार मौजूद है। बिंटा ने कहा कि यदि एक वर्ष के लिए फोर्टिफाइड चावल की डिलीवरी रोक दी जाती है, तो FRK से जुड़ी जटिलताओं के कारण चावल मिलिंग उद्योग पर जो भारी दबाव बना हुआ है, वह काफी हद तक कम हो जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अतिरिक्त भंडार होने के बावजूद FRK पर लगातार जोर देने से मिलिंग कार्य प्रभावित हुआ है और पंजाब के चावल मिलरों पर अनावश्यक वित्तीय और परिचालन दबाव बढ़ा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने और उद्योग को तत्काल राहत देने की अपील की।
चर्चा के दौरान तरुण चुघ ने सुझाव दिया कि एफआरके को जारी रखने के बजाय सरकार को कम पॉलिश किए गए चावल को स्वीकार करने की नीति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एफसीआई पंजाब से अत्यधिक पॉलिश किया हुआ चावल स्वीकार कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। चुघ ने जोर देकर कहा कि यदि कम पॉलिश चावल की नीति अपनाई जाती है, तो चावल की प्राकृतिक गुणवत्ता बनी रहेगी और फोर्टिफिकेशन की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी। इससे जहां उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को लाभ होगा, वहीं देश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ भी कम होगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रणजीत सिंह जोसन ने एआई आधारित अनाज विश्लेषक मशीनों को तुरंत पुनः लागू करने की मांग की। उन्होंने मंत्री को अवगत कराया कि ये मशीनें पिछले एक वर्ष से गैर-कार्यक्षील हैं, जिसके कारण एफसीआई स्टाफ द्वारा मनमाने तरीके से काम किया जा रहा है और चावल मिलरों में व्यापक असंतोष है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्रणालियों को बंद रखना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के विपरीत है और इससे खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। इस पर मंत्री ने मौके पर मौजूद मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि एआई आधारित मशीनों की समयबद्ध जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए और यदि किसी प्रकार के उन्नयन की आवश्यकता हो तो उसे पूरा कर तुरंत प्रभाव से दैनिक संचालन में सख्ती से लागू किया जाए, ताकि मानवीय हस्तक्षेप समाप्त हो सके।
पंजाब में भंडारण स्थान की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि इस वर्ष पंजाब से लगभग 105 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल की डिलीवरी होनी है, जबकि राज्य के अधिकांश गोदाम पहले से ही चावल और गेहूं के भंडार से भरे हुए हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि पंजाब से चावल और गेहूं की आवाजाही तेज नहीं की गई, तो मौजूदा गति से 105 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी पूरी करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। इससे चावल की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है और पहले से आर्थिक संकट झेल रहे राज्य के चावल उद्योग को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन को आश्वासन दिया कि पंजाब से संबंधित सभी मामलों पर उच्च स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द फोर्टिफिकेशन से जुड़े गंभीर मुद्दों सहित सभी मामलों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे और चावल उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक एवं व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। बैठक में हरि ओम मित्तल, इंदरजीत गर्ग जॉली, कमल गर्ग (फिरोजपुर), पंकज गर्ग, नवीन गोयल (जगराओं), दीपक गर्ग, संजीव कुमार तथा एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।