Edited By Urmila,Updated: 25 Apr, 2026 02:07 PM

लॉकर से गहने गायब होने पर पंजाब नैशनल बैंक (पी.एन.बी.) को एक करोड़ रुपए हर्जाना भरना होगा। सैक्टर-9 निवासी बेला प्रसाद की याचिका पर जिला उपभोक्ता आयोग ने यह फैसला सुनाया है।
चंडीगढ़ (सुशील): लॉकर से गहने गायब होने पर पंजाब नैशनल बैंक (पी.एन.बी.) को एक करोड़ रुपए हर्जाना भरना होगा। सैक्टर-9 निवासी बेला प्रसाद की याचिका पर जिला उपभोक्ता आयोग ने यह फैसला सुनाया है। बैंक को 1 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि भी अदा करने के निर्देश दिए हैं।
बेला प्रसाद का कहना है कि पी.एन.बी. सैक्टर-17बी स्थित हाई वैल्यू ब्रांच में वर्ष 2004 से ज्वाइंट एकाऊंट था। मां कमलेश कालरा के साथ संयुक्त खाते के तहत 2 लॉकर (नंबर 37 और 38) अलॉट हुए थे। वह रेगुलर फीस भी भर रही थीं। मां के निधन के बाद औपचारिकताएं पूरी कर लॉकर नंबर 38 को सरैंडर कर गहने लाकर नंबर-37 में ट्रांसफर कर दिए थे।
कुछ समय बाद बैंक की सैक्टर-17बी वाली ब्रांच का विलय सैक्टर-9 शाखा में हो गया। सभी खाते और लॉकर भी वहां ट्रांसफर कर दिए गए। शिकायतकर्त्ता के अनुसार, वर्ष 2020 में लॉकर नंबर 37 संचालित करने पहुंचीं, तो बैंक अधिकारियों ने यह कहकर रोक दिया कि लॉकर पहले ही बंद कर अन्य व्यक्ति को अलॉट कर दिया गया है।
उन्होंने कभी भी लॉकर बंद करने का अनुरोध नहीं किया था और अब भी उसकी चाबी मौजूद थी। इससे स्पष्ट होता है कि लॉकर कभी सरैंडर नहीं किया था। उन्होंने बताया कि लॉकर में करीब एक करोड़ के गहने रखे थे।
आयोग में पक्ष रखते हुए बैंक ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार लॉकर 2013 में बंद कर दिया गया था, जिसे 2019 में तोड़ा गया। हालांकि आयोग ने पाया कि बैंक लॉकर बंद करने की प्रक्रिया, पूर्व सूचना देने और इन्वैंट्री तैयार करने जैसे आवश्यक नियमों का पालन करने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। आयोग ने कहा कि केवल आंतरिक रिकॉर्ड के आधार पर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता और यह सेवा में गंभीर कमी का मामला है।
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