टैक्स नहीं चुकाया तो प्रॉपर्टी सील! डिफॉल्टरों के खिलाफ एक्शन मोड में प्रशासन

Edited By Urmila,Updated: 13 Apr, 2026 10:32 AM

administration in action mode against tax defaulters

जीरकपुर नगर काउंसिल ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए प्रॉपर्टी टैक्स के बकाए को लेकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है।

जीरकपुर (धीमान): जीरकपुर नगर काउंसिल ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए प्रॉपर्टी टैक्स के बकाए को लेकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। लंबे समय से टैक्स न भरने वाले करीब 500 डिफॉल्टर्स की लिस्ट तैयार की गई है और ये सभी अब सीधे म्युनिसिपल काउंसिल के रडार पर हैं। खासकर, PR-7 एयरपोर्ट रोड पर मौजूद कमर्शियल यूनिट्स पर निगरानी बढ़ा दी गई है, जहां जानकारी मिली है कि मार्बल समेत कई कमर्शियल यूनिट्स पर बड़ी रकम का बकाया है। यह इलाका तेजी से विकसित हो रहे कमर्शियल हब के तौर पर उभर रहा है, जिसके चलते यहां टैक्स बकाए के मामले प्रशासन के लिए संवेदनशील बन गए हैं।

नगर काउंसिल पिछले वित्तीय साल दौरान 20 करोड़ रुपये का टारगेट रखा था, लेकिन वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम के चलते यह इनकम करीब 34 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद अभी भी करोड़ों रुपये पेंडिंग हैं, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। टैक्स ब्रांच ने पहले फेज में 90 डिफॉल्टर्स को नोटिस जारी किए हैं, जबकि बाकी को एक के बाद एक नोटिस भेजे जा रहे हैं। कई मामलों में 2014 से टैक्स न देने की बात सामने आई है, जबकि खाली प्लॉट के मालिक भी टैक्स देने से बच रहे हैं।

सीलिंग तक पहुंच सकती है कार्रवाई

नगर काउंसिल के कार्यकारी ऑफिसर परविंदर सिंह भट्टी ने कहा कि अगर कोई मालिक तीन नोटिस के बावजूद टैक्स जमा नहीं करता है, तो ऐसी प्रॉपर्टी को सील करने तक की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि टैक्स रिकवरी के लिए ग्राउंड लेवल पर टीमें तैनात कर दी गई हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि सारी कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। इसके साथ ही शहरवासियों से अपील की गई है कि वे समय पर टैक्स देकर जुर्माने और सख्त कार्रवाई से बचें। अधिकारियों के मुताबिक, प्रॉपर्टी टैक्स से जमा होने वाला पैसा सड़क, सीवरेज, सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होता है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह टैक्स देकर शहर के विकास में अपना योगदान दे। नगर परिषद की यह मुहिम आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, जिससे डिफॉल्टर्स पर दबाव बढ़ेगा और टैक्स रिकवरी और मजबूत होगी।

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