PM नरेंद्र मोदी और सुखबीर बादल के बीच हाई-लेवल मीटिंग

Edited By Kamini,Updated: 07 Aug, 2026 12:38 PM

meeting between pm modi and sukhbir badal

राजनीति से जुड़ी इस समय की बड़ी खबर सामने आई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक, ये मीटिंग संसद भवन परिसर में हुई।

पंजाब डेस्क : राजनीति से जुड़ी इस समय की बड़ी खबर सामने आई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक, ये मीटिंग संसद भवन परिसर में हुई। 

सुखबीर बादल सुबह ही दिल्ली पहुंचे थे, जिसके बाद उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में विधानसभा चुनाव को करीब 4 महीने रह गए हैं। ऐसे में सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मीटिंग को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

इस मीटिंग को सिर्फ़ एक फॉर्मल मीटिंग मानना ​​जल्दबाजी होगी, खासकर ऐसे समय में जब पंजाब की राजनीति 2027 के विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ रही है। हालांकि मीटिंग के एजेंडा की अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि इस मीटिंग में पंजाब के मौजूदा हालात पर चर्चा हुई।

लंबे समय तक अकाली दल 94 और भाजपा 23 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ती रही। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत दोनों दलों का अलग-अलग लेकिन पूरक वोट बैंक रहा है। अकाली दल की मजबूत पकड़ ग्रामीण, किसान और पंथक क्षेत्रों में मानी जाती थी, जबकि भाजपा का प्रभाव शहरी इलाकों और हिंदू मतदाताओं के बीच अधिक रहा। दोनों दलों के साथ आने से गांव और शहर का मजबूत चुनावी समीकरण तैयार होता था।

गठबंधन की दूसरी बड़ी विशेषता तय सीट बंटवारा और मजबूत संगठनात्मक तालमेल था। दोनों पार्टियां अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में चुनाव मैदान में उतरती थीं और जमीनी स्तर पर भी कार्यकर्ता एक-दूसरे के उम्मीदवारों का पूरा सहयोग करते थे। दोनों दलों के समर्थकों का वोट बंटने के बजाय एकजुट होकर गठबंधन के उम्मीदवारों को मिलता था, जिससे कई सीटों पर जीत आसान हो जाती थी। यही रणनीति 2012 के विधानसभा चुनाव में सफल साबित हुई, जब अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई।

हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूटने के बाद दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे। इसका असर चुनावी नतीजों पर भी साफ दिखाई दिया। वोट बंटने से न सिर्फ दोनों पार्टियों की चुनावी ताकत कमजोर हुई, बल्कि दोनों ही दल विधानसभा में दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!