Edited By Urmila,Updated: 15 Sep, 2026 12:02 PM

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को रिटायरमेंट बेनिफिट्स जारी करने में देरी के कारण पेंशन और ग्रेच्युटी की रकम पर 7 फीसदी सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।
चंडीगढ़ (गंभीर): पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को रिटायरमेंट बेनिफिट्स जारी करने में देरी के कारण पेंशन और ग्रेच्युटी की रकम पर 7 फीसदी सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। मामला पंजाब पुलिस के रिटायर्ड कर्मचारी बलविंदर सिंह से जुड़ा है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 20 जून 2018 से असल पेमेंट की तारीख तक ब्याज दिया जाए और पूरी रकम 2 महीने के अंदर दी जाए।
पढ़ें क्या है पूरा मामला
अमृतसर के रहने वाले बलविंदर सिंह 11 जून 1982 को पंजाब पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। अपनी सर्विस के दौरान उन्हें हेड कांस्टेबल और फिर असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया। उन्हें 31 दिसंबर 2017 को रिटायर होना था, लेकिन उससे ठीक 14 दिन पहले, 18 दिसंबर 2017 को, अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में पुलिस कस्टडी से एक आरोपी के भागने के मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया और 22 दिसंबर को उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। बलविंदर सिंह ने बर्खास्तगी के खिलाफ रिवीजन पिटीशन फाइल की। 19 अप्रैल 2018 को, पुलिस डिपार्टमेंट ने पिटीशन स्वीकार कर ली और 22 दिसंबर 2017 से उन्हें नौकरी में बहाल करने और सभी बकाया बेनिफिट्स देने का आदेश दिया। उनकी उम्र के कारण उन्हें 31 दिसंबर 2017 से रिटायर माना गया। डिपार्टमेंटल जांच में भी उन्हें बेगुनाह पाया गया। बाद में, 24 सितंबर 2024 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी बलविंदर सिंह को क्रिमिनल केस में बरी कर दिया।
डिपार्टमेंट ने अंतरिम पेंशन, लीव इनकैशमेंट और पी.एफ. की राशि जारी कर दी गई, लेकिन पेंशन का बकाया 3,81,569 रुपये और ग्रेच्युटी के 10 लाख रुपये की पेमेंट 1 नवंबर, 2021 की गई। इस तरह, बहाली के आदेश के बाद इन दोनों रकमों के पेमेंट में 3 साल 6 महीने से ज़्यादा की देरी हुई। सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि क्रिमिनल केस पेंडिंग होने की वजह से पेमेंट में देरी हुई और यह जानबूझकर नहीं किया गया। इस पर जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि जब कर्मचारी को नौकरी से निकालने की तारीख से बहाल कर दिया गया था और उसे रिटायर भी मान लिया गया था, तो उसके रिटायरमेंट बेनिफिट्स सही समय पर जारी कर दिए जाने चाहिए थे। कोर्ट ने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिटायर्ड कर्मचारी का यह अधिकार है कि उसे समय पर पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिलें। आम तौर पर, रिटायरमेंट के 2 महीने के अंदर पेमेंट हो जाना चाहिए। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 20 जून, 2018 से असल पेमेंट होने तक 7 परसेंट सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।
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