Edited By Kamini,Updated: 05 Sep, 2026 01:56 PM

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा अदालतों में सरकारी गवाह के तौर पर पेश होने में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है।
चंडीगढ़ (अंकुर): पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा अदालतों में सरकारी गवाह के तौर पर पेश होने में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। एक क्रिमिनल केस में निचली अदालत में गवाही देने से बार-बार गैरहाजिर रहने वाले पंजाब पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हरजिंदर सिंह के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब पुलिस अधिकारी निचली अदालत के आदेशों का पालन करते हुए गवाही देने नहीं आ रहा था, तो आरोपी की बेल का विरोध करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना बहुत गंभीर मामला है।
कोर्ट ने यहां तक कहा कि हालात ऐसे थे कि संबंधित पुलिस अधिकारी को कोर्ट में ही गिरफ्तार कर लेना चाहिए था ताकि दूसरे पुलिस अधिकारियों को भी यह साफ और मजबूत मैसेज मिल सके कि अदालती कार्रवाई में सरकारी गवाह होने की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के संज्ञान में आया कि ASI हरजिंदर सिंह को एक क्रिमिनल केस में गवाही देने के लिए ट्रायल कोर्ट में पेश होना था। इस बारे में कोर्ट ने उन्हें कई मौके दिए लेकिन वह बार-बार कोर्ट में पेश होने से बचते रहे। ट्रायल कोर्ट ने भी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए उनकी मौजूदगी पक्की करने के लिए कदम उठाए।
इसके बावजूद जब वह पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ बेलेबल और बाद में नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया गया। इन सभी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब किसी क्रिमिनल केस की सुनवाई के लिए सरकारी गवाह की गवाही ज़रूरी होती है, तो उनका कोर्ट में पेश न होना न सिर्फ पर्सनल लापरवाही का मामला बनता है बल्कि इंसाफ के प्रोसेस पर भी असर डालने वाला मामला बनता है। इस मामले में हाई कोर्ट की नाराज़गी का एक बड़ा कारण यह था कि ASI हरजिंदर सिंह अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए लोअर कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे, लेकिन जब आरोपी ने बेल के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो पुलिस ऑफिसर आरोपी की बेल का विरोध करने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए।
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