क्राइम ग्राफ कम दिखाने का नया फंडा! 4 अलग-अलग तारीखों की टावर चोरी, FIR सिर्फ एक

Edited By Vatika,Updated: 09 Jul, 2026 09:13 AM

ludhiana police news

महानगर में अपराध और चोरी की वारदातों पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे करने वाली लुधियाना पुलिस का एक

लुधियाना, (राज): महानगर में अपराध और चोरी की वारदातों पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे करने वाली लुधियाना पुलिस का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने जनता को हैरान कर दिया है। पुलिस ने शहर के क्राइम ग्राफ को कागजों पर कम और साफ-सुथरा दिखाने के चक्कर में एक नया और अनोखा 'जुगाड़' ढूंढ निकाला है। लुधियाना के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों और अलग-अलग महीनों व तारीखों में हुई 4 बड़ी चोरियों की वारदातों को अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज करने की बजाय, खाकी ने अपनी सहूलियत के लिए सबको एक ही मुकदमे की फाइल में समेट कर 'महा-खिचड़ी' बना दी है। इंडस टावर्स (Indus Towers) की सुरक्षा देखने वाली कंपनी के अधिकारी के बयान पर अब जाकर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, यह मामला 'B4S सॉल्यूशंस' कंपनी में बतौर सिक्योरिटी अफसर की लिखित शिकायत पर दर्ज किया गया है। अफसर ने पुलिस को दिए अपने बयानों में बताया कि उनकी कंपनी 'इंडस टावर्स' (Indus Towers) के तहत मोबाइल टावरों की सुरक्षा और रखरखाव का काम संभालती है। पिछले कुछ महीनों के भीतर लुधियाना के अलग-अलग गांवों में चोरों ने टावरों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के कीमती Airtel Samsung GUC/BBU कार्ड चोरी कर लिए।

तारीख-दर-तारीख... देखें कहाँ-कहाँ और कब-कब हुई चोरियां:
सुरक्षा अधिकारी द्वारा पुलिस को सौंपे गए ब्योरे के मुताबिक चोरों ने सिलसिलेवार ढंग से इन वारदातों को अंजाम दिया:
वारदात-1 (02 जुलाई 2026): गाँव जड़तौली (Jardtoli) में स्थित इंडस टावर नंबर IN-3179325 से एयरटेल सैमसंग GUC/BBU कार्ड चोरी हुआ।
वारदात-2 (19 जून 2026): गाँव शंकर (Shankar) के इंडस टावर नंबर IN-1057811 को निशाना बनाकर कीमती कार्ड उड़ाया गया।
वारदात-3 (10 मई 2026): गाँव आलमगीर (Alamgir) स्थित इंडस टावर नंबर IN-1273455 से चोरों ने शातिर तरीके से कार्ड चोरी किए।
वारदात-4 (27 अप्रैल 2026): गाँव सायां (Sayan) के पास स्थित इंडस टावर नंबर IN-6006440 से अज्ञात चोरों ने कीमती उपकरण पार कर दिए।

अलग महीना, अलग जगह... फिर क्यों एक ही FIR?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक और कानूनी सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अप्रैल, मई, जून और जुलाई (अलग-अलग महीनों) में अलग-अलग गांवों (जड़तौली, शंकर, आलमगीर, सायां) में चोरियां हुईं। कानूनन हर वारदात की तारीख और जगह अलग होने के कारण अलग-अलग एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी ताकि पुलिस मुस्तैदी से हर इलाके में चोरों के सुराग तलाशती। लेकिन खाकी ने कागजी कागजी आंकड़ों में लुधियाना को महफूज़ दिखाने और अपनी मेहनत बचाने के लिए चारों बड़ी वारदातों को एक ही एफआईआर में नत्थी कर दिया।

क्राइम रिकॉर्ड को 'सफेद' रखने की कशमकश!
सूत्रों की मानें तो पुलिस के उच्च अधिकारियों की मीटिंग में थानों के क्राइम ग्राफ की समीक्षा की जाती है। जिस थाने में ज्यादा एफआईआर दर्ज होती हैं, वहां के प्रभारियों पर गाज गिरना तय माना जाता है। खुद को कार्रवाई से बचाने और इलाके में 'सब ठीक है' का बोर्ड लगाने के लिए पुलिस अक्सर ऐसी चोरियों को पेंडिंग रखती है और बाद में एक ही कंबाइंड (Combined) एफआईआर दर्ज करके आंकड़ों को बढ़ने से रोक लेती है। जानकारों का कहना है कि इस तरह 4 अलग-अलग समय पर हुई चोरियों को एक साथ जोड़ने से जांच एजेंसियां भी भ्रमित होती हैं और चोरों को पकड़े जाने का चांस बेहद कम हो जाता है।

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