लुधियाना नगर निगम की 'इज्जत' दांव पर: 120 सिटी बसों की नीलामी में बचा सिर्फ 1 दिन, अफसरों के छूटे पसीने!

Edited By Vatika,Updated: 01 Jul, 2026 01:50 PM

ludhiana municipal corporation

महानगर की लाइफलाइन कही जाने वाली 'लोकल सिटी बस सर्विस' को लेकर इस वक्त लुधियाना नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है

लुधियाना(राज): महानगर की लाइफलाइन कही जाने वाली 'लोकल सिटी बस सर्विस' को लेकर इस वक्त लुधियाना नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है। अदालत के आदेशों के बाद निगम की 120 सिटी बसों की नीलामी में अब सिर्फ 24 घंटे यानी महज एक दिन का समय शेष रह गया है। अगर आज निगम ने कोई बड़ा कानूनी रास्ता नहीं निकाला, तो कल यानी 2 जुलाई को अदालत के आदेश पर इन बसों को सरेआम नीलाम (कुर्क) कर दिया जाएगा। इस बड़ी फजीहत और कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए निगम के आला अधिकारी फाइलों को री-चेक करने और कानूनी पैंतरे ढूंढने की तैयारियों में रात-दिन जुटे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 2 जुलाई को बसों की नीलामी का अंतिम आदेश दिया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आगामी 9 जुलाई को माननीय अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। इस संबंध में बीते 25 जून को ही नगर निगम कार्यालय की दीवार पर नीलामी का आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया गया था। जब इस गंभीर मुद्दे पर निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार से बात की गई, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में कहा, "चूंकि यह पूरा मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

आखिर कहाँ से शुरू हुआ विवाद? 45 रुपये से 88 रुपये लीटर पहुंचे डीजल ने बिगाड़ा खेल
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2015 से जुड़ी हुई हैं। उस समय लुधियाना नगर निगम ने शहर में सिटी बसों के संचालन का जिम्मा 'होराइजन ट्रांसवे कंपनी' को सौंपा था। दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के अनुसार, यदि भविष्य में डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो उसी अनुपात में बसों के किराए में भी वृद्धि की जानी थी। साल 2015 में जब काम शुरू हुआ, तब डीजल का दाम महज 45 रुपये प्रति लीटर था, जो आज बढ़कर 88 रुपये के पार पहुँच चुका है। कंपनी के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद निगम ने अपने कार्यकाल में सिर्फ एक बार मामूली किराया बढ़ाया। लगातार हो रहे भारी-भरकम घाटे के कारण विवाद ट्रिब्यूनल की दहलीज पर पहुँच गया।

ट्रिब्यूनल का 6.80 करोड़ का झटका और हाईकोर्ट का सख्त आदेश 
लंबे विवाद के बाद साल 2024 में ट्रिब्यूनल ने नगर निगम को तगड़ा झटका देते हुए कंपनी को 6.80 करोड़ रुपये हर्जाना अदा करने का आदेश सुना दिया। इसके बाद मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुँचा। हाईकोर्ट ने निगम को राहत देने से पहले एक शर्त रखी कि सुनवाई शुरू होने से पहले ट्रिब्यूनल द्वारा तय की गई राशि का 50 फीसदी हिस्सा (नकद कैश) और शेष 50 फीसदी की बैंक सिक्योरिटी जमा करवाई जाए।

निगम की चालाकी पड़ी भारी: कैश देने की बजाय खड़ी कर दीं बसें!
आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम ने चालाकी दिखाते हुए सिक्योरिटी के तौर पर अपनी 80 बसें तो कोर्ट के आगे रख दीं, लेकिन 50% नकद राशि देने में हाथ खड़े कर दिए। निगम की इसी ढिलाई का नतीजा है कि आज अदालत ने सीधे बसों को ही नीलाम करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

कबाड़ हो चुकी हैं 68 बसें, सड़कों पर सिर्फ 15!
हैरानी की बात यह है कि कभी शहर की सड़कों पर शान से दौड़ने वाली इन बसों का बेड़ा अब पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। वर्तमान में शहर के लाखों लोगों के लिए केवल 15 बसें ही किसी तरह सड़कों पर रेंग रही हैं, जबकि 68 खटारा हो चुकी बसें कंपनी पहले ही निगम को वापस सौंप चुकी है। यदि 2 जुलाई (यानी कल) को निगम ने कोर्ट में कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया, तो निगम के बेड़े से ये सभी 120 बसें हमेशा के लिए छिन जाएंगी।

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