Bhatinda में हाई वोल्टेज ड्रामा: अकेली लड़की और निगम टीम आमने-सामने

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 13 Mar, 2026 06:02 PM

lone girl and municipal team face off in bathinda

माल रोड क्षेत्र में शुक्रवार को नगर निगम की कार्रवाई के दौरान उस समय नाटकीय स्थिति बन गई, जब कब्जा हटाने पहुंची निगम टीम एक लड़की के तीखे विरोध के आगे कुछ समय के लिए पीछे हटने को मजबूर हो गई। हालांकि बाद में निगमायुक्त के निर्देश के बाद टीम दोबारा...

बठिंडा (विजय वर्मा): माल रोड क्षेत्र में शुक्रवार को नगर निगम की कार्रवाई के दौरान उस समय नाटकीय स्थिति बन गई, जब कब्जा हटाने पहुंची निगम टीम एक लड़की के तीखे विरोध के आगे कुछ समय के लिए पीछे हटने को मजबूर हो गई। हालांकि बाद में निगमायुक्त के निर्देश के बाद टीम दोबारा पहुंची और पुलिस की मौजूदगी में दुकान को खाली करवा कर कब्जा ले लिया।

जानकारी के अनुसार प्रीत सिंह रोड पर स्थित एक दुकान व साथ लगते मकान को लेकर नगर निगम और कब्जाधारी परिवार के बीच करीब 49 साल से अदालत में मामला चल रहा था। हाल ही में अदालत ने नगर निगम के पक्ष में फैसला देते हुए निगम को कब्जा लेने की डिग्री दे दी थी। इसी आदेश के तहत शुक्रवार को निगम की टीम सुपरिटेंडेंट गोपाल कृष्ण और क्लर्क नीरज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची।

बताया जाता है कि उस समय घर में परिवार के सदस्य मौजूद नहीं थे और केवल एक लड़की व उसकी दादी घर में थीं। जैसे ही निगम टीम ने दुकान खाली करवाने और सामान बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की, लड़की ने कड़ा विरोध जताया और अधिकारियों को चुनौती दे दी। लड़की के तेवरों के चलते निगम टीम को कुछ देर के लिए मौके से लौटना पड़ा।

परिवार का कहना था कि वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से यहां रह रहे हैं और बाहर एक छोटी दुकान चलाकर गुजर-बसर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि निगम टीम बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के सामान बाहर फेंकने लगी, जिस पर उन्होंने विरोध किया। लड़की ने अधिकारियों से कहा कि उसके माता-पिता सुबह ही ट्रेन से दिल्ली गए हैं और उनके लौटने के बाद ही बात होगी। उसने यह भी कहा कि वह घर में अकेली है और जबरन सामान फेंकने की कोशिश की गई तो वह इसका विरोध करेगी।

सूत्रों के अनुसार निगम अधिकारियों को वापस लौटने पर वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार भी सुननी पड़ी। इसके बाद टीम दोबारा मौके पर पहुंची और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दुकान को खाली कर वहां रखा सामान कब्जे में ले लिया।

वहीं कब्जाधारी परिवार की सदस्य शिल्पी शर्मा का कहना है कि वे इस स्थान पर कई दशकों से रह रहे हैं और वर्ष 1977 से इसका केस अदालत में चल रहा था। उन्होंने कहा कि भले ही वे कोर्ट से केस हार गए हों, लेकिन प्रशासन को मानवता के आधार पर पहले उन्हें सूचना देकर कुछ समय देना चाहिए था ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें।

दूसरी ओर मौके पर मौजूद निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेशों के तहत की गई है। कोर्ट की ओर से ही संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए गए थे, इसलिए प्रशासन की ओर से अलग से नोटिस देने की आवश्यकता नहीं थी। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल दुकान खाली करवाई गई है और आने वाले दिनों में साथ लगते आवासीय हिस्से को भी खाली करवाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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