LADC नीति के विरोध में आंदोलन निर्णायक दौर में, 22वें दिन भी ‘नो वर्क’ जारी

Edited By Kalash,Updated: 28 Jul, 2026 04:52 PM

ladc protest layers no work

LADC (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) नीति के विरोध में पंजाब भर के अधिवक्ताओं का आंदोलन निर्णायक दौर में पहुंच गया है।

लुधियाना (मेहरा): LADC (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) नीति के विरोध में पंजाब भर के अधिवक्ताओं का आंदोलन निर्णायक दौर में पहुंच गया है। लगातार 22वें दिन भी ‘नो वर्क’ पूरी तरह प्रभावी रहा, जबकि जिला बार एसोसिएशन, लुधियाना के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रही।

बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट विपन सगड़ ने कहा कि LADC नीति के खिलाफ वकीलों का संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता और LADC नीति वापस नहीं ली जाती, तब तक ‘नो वर्क’ और आंदोलन जारी रहेगा।

इसके उपरांत बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर से डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक रोष मार्च निकाला। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर वकीलों ने सरकार तथा LADC प्रणाली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। डी.सी. कार्यालय के बाहर धरना देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि लिखित आश्वासन मिलने और LADC नीति वापस लिए जाने तक आंदोलन और ‘नो वर्क’ किसी भी सूरत में समाप्त नहीं होगा।

‘नो वर्क’ के चलते मंगलवार को जिला न्यायालय परिसर में अदालती कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। अधिकांश मामलों में केवल अगली तारीखें दी गईं, जबकि नियमित न्यायिक कार्य लगभग पूरी तरह ठप रहा। अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना एवं भूख हड़ताल जारी रखते हुए सरकार से शीघ्र लिखित आश्वासन जारी करने की मांग दोहराई।

इस बीच, जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ऑफ बार एसोसिएशंस, पंजाब, हरियाणा एवं यू.टी. चंडीगढ़ ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। कमेटी के संयोजक एडवोकेट सतविंदर सिंह सिद्धू ने 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर LADC नीति के विरोध में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी है। आवेदन के अनुसार यह प्रदर्शन दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक प्रस्तावित है। बार नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।

बार एसोसिएशन ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, न्याय व्यवस्था की गरिमा तथा आम नागरिकों की न्याय तक प्रभावी एवं सुलभ पहुंच की रक्षा का संघर्ष है। उन्होंने सभी बार एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों और न्यायप्रिय नागरिकों से आंदोलन को नैतिक समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष और ‘नो वर्क’ पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

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