Edited By Urmila,Updated: 24 Jul, 2026 11:01 AM

पंजाब में निजी स्कूलों की फीस को लेकर सरकार और स्कूल प्रबंधन आमने-सामने आ गए हैं। राज्य सरकार के नए फीस नियंत्रण अध्यादेश के खिलाफ निजी स्कूल संचालकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है।
पंजाब डेस्क : पंजाब में निजी स्कूलों की फीस को लेकर सरकार और स्कूल प्रबंधन आमने-सामने आ गए हैं। राज्य सरकार के नए फीस नियंत्रण अध्यादेश के खिलाफ निजी स्कूल संचालकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई शुरू कर दी है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सरकार 25 जुलाई से अध्यादेश के तहत कार्रवाई शुरू कर सकती है। इसी वजह से उन्होंने अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई में अध्यादेश के विभिन्न प्रावधानों की वैधता पर बहस होगी।
याचिका में स्कूल संचालकों ने कहा है कि सरकार द्वारा फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय करना निजी स्कूलों की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक बढ़ती महंगाई, शिक्षकों के वेतन, रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं पर होने वाले खर्च के बीच इतनी सीमित बढ़ोतरी से स्कूलों का संचालन प्रभावित होगा। स्कूल प्रबंधन ने उस प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें पिछले तीन वर्षों में निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई फीस को अभिभावकों को लौटाने या भविष्य की फीस में समायोजित करने का निर्देश दिया गया है। उनका कहना है कि यह राशि पहले ही स्कूल संचालन और विकास कार्यों पर खर्च हो चुकी है, इसलिए इसे वापस करना व्यावहारिक नहीं है।
इसके अलावा, बस शुल्क, कंप्यूटर, लैब, खेल गतिविधियों और अन्य चार्ज को भी फीस का हिस्सा मानने के फैसले का विरोध किया गया है। स्कूलों का कहना है कि अलग-अलग सेवाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्क को एक ही श्रेणी में रखने से वित्तीय व्यवस्था प्रभावित होगी। साथ ही, अध्यादेश में जुर्माना और मान्यता रद्द करने जैसे प्रावधानों को भी उन्होंने अत्यधिक कठोर बताया है।
वहीं, सरकार का नया अध्यादेश निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसके तहत स्कूल बिना अनुमति सालाना 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। अधिक वृद्धि के लिए पहले सरकारी मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, सभी स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस का पूरा रिकॉर्ड सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
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