Edited By Kalash,Updated: 22 Sep, 2026 10:42 AM

नगर निगम जालंधर के लिए शहर में लगे अवैध धार्मिक और राजनीतिक फ्लेक्स अब बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर सकते हैं।
जालंधर (खुराना): नगर निगम जालंधर के लिए शहर में लगे अवैध धार्मिक और राजनीतिक फ्लेक्स अब बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर सकते हैं। शहर के आऊटडोर विज्ञापन का ठेका करीब 13.71 करोड़ रुपए में लेने वाली कंपनी क्रिएटिव ओ.ओ.एच. ने नगर निगम के मेयर और कमिश्नर को भेजे अंतिम रिमाइंडर में दावा किया है कि उसके निर्धारित आऊटडोर मीडिया डिवाइस (यूनिपोल/होर्डिंग साइट्स) पर 100 से ज्यादा अवैध फ्लेक्स जबरन लगाए गए हैं। कई साइट्स ऐसी हैं जहां कंपनी के भुगतान करने वाले क्लाइंट के विज्ञापन पहले से लगे हुए थे, जिन्हें ढक दिया गया या खराब कर दिया गया। इनमें कुछ ऐसे स्थान भी शामिल हैं, जहां पंजाब सरकार की उपलब्धियों से संबंधित विज्ञापन लगे हुए थे। इन पर रातों रात अवैध फ्लेक्स लगा दिए गए।
कंपनी के प्रतिनिधि निशांत मित्तल ने स्पष्ट किया है कि यदि इन अवैध फ्लेक्स को तुरंत नहीं हटाया गया तो कंपनी 23 सितंबर से शुरू होने वाली अगली अवधि की लाइसेंस फीस रोकने का फैसला ले सकती है। कंपनी का कहना है कि उसने 22 सितम्बर तक की लाइसेंस फीस पहले ही जमा करवा दी है, लेकिन जिन साइट्स पर अवैध कब्जा है, उनके कमर्शियल इस्तेमाल की स्थिति बहाल होने तक अगली अवधि की फीस को लेकर उसका दावा विवादित रहेगा।
गौरतलब है कि क्रिएटिव कंपनी ने कुछ महीने पहले नगर निगम से शहर के आऊटडोर विज्ञापन का ठेका हासिल किया था। कंपनी के अनुसार वह हर महीने टेक्स सहित करीब 1.40 करोड़ रुपए नगर निगम को जमा करवा रही है। ऐसे समय में जब निगम पहले ही वित्तीय दबाव से गुजर रहा है, अगर कंपनी ने मासिक किस्त रोक दी तो निगम को बड़ा वित्तीय झटका लग सकता है।
कंपनी ने मेयर और कमिश्नर को भेजे पत्र में कहा है कि उसने आउटडोर विज्ञापन ढांचे तैयार करने और लगाने पर अब तक 15 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। इसके अलावा बिजली, मुरम्मत, रखरखाव, कर्मचारियों की तनख्वाह और अन्य खर्च भी कंपनी को लगातार वहन करने पड़ रहे हैं। क्रिएटिव ओ.ओ.एच. ने अपने अंतिम रिमाइंडर में कहा कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो कंपनी अपनी ओर से की गई तमाम शिकायतों, हो रहे वित्तीय नुकसान और निगम द्वारा अनुबंध के तहत अपेक्षित प्रशासनिक सहायता उपलब्ध न करवाए जाने का पूरा रिकॉर्ड पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सामने रख सकती है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन 100 से ज्यादा यूनिपोल पर लगे अवैध फ्लैक्स को हटाने के लिए क्या कार्रवाई करता है या फिर कार्रवाई में देरी के कारण निगम को हर महीने मिलने वाली करोड़ों रुपए की राशि पर भी संकट खड़ा हो जाता है।
त्योहारी सीजन में ज्यादा नुकसान की आशंका
कंपनी ने निगम को भेजे पत्र में कहा है कि इस समय त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और आऊटडोर विज्ञापन कारोबार के लिए यह साल का महत्वपूर्ण समय होता है। ऐसे में यदि क्लाइंट द्वारा बुक किए गए विज्ञापन अवैध फ्लेक्स से ढके रहेंगे तो कंपनी को भारी फाइनेंशियल नुकसान होगा। कंपनी का कहना है कि बाद में लाइसेंस फीस में किसी तरह की छूट या एडजस्टमेंट से भी इस नुकसान की पूरी भरपाई संभव नहीं होगी।
कंपनी ने अपने पत्र में कहा है कि टेंडर और बाद में हुए सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट में यह प्रावधान किया गया है कि यूनिपोल और अन्य निर्धारित विज्ञापन स्थलों पर लगाए गए अवैध धार्मिक एवं राजनीतिक फ्लैक्स हटाने में नगर निगम आवश्यक सहायता देगा। जरूरत पड़ने पर निगम पुलिस और कमिश्नरेट पुलिस के साथ तालमेल कर कार्रवाई करवाने में भी सहायता करेगा। कंपनी ने निगम से सभी अवैध फ्लेक्स तुरंत हटाकर प्रभावित यूनिपोल साइट्स को दोबारा उसके हवाले करने की मांग की है।
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