Edited By Urmila,Updated: 18 Sep, 2026 11:30 AM

श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले को लेकर सोडल नगर स्थित रामलीला पार्क में झूले लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
जालंधर (चोपड़ा): श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले को लेकर सोडल नगर स्थित रामलीला पार्क में झूले लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोढल मंदिर चौक से द्वारका चौक रोड पर स्थित सोडल रामलीला पार्क में झूले लगाने की मंजूरी दिए जाने से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि झूला लगाने की तैयारी में पार्क के गेट और ग्रिल को तोड़ दिया गया, झूले खड़े करने के लिए जगह-जगह गड्ढे खोद दिए गए तथा पार्क में बनी फुटपाथ को भी नुकसान पहुंचाया गया।
राहुल, रजिंदर कुमार, सन्नी महाजन, विवेक महाजन सहित इलाका निवासियों का कहना है कि पार्क लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए सार्वजनिक स्थान के रूप में इस्तेमाल होता आ रहा है और इसे लोगों ने अपने स्तर पर विकसित कर हरा-भरा बनाया है। पिछले करीब 26 वर्षों से पार्क में इस तरह का बड़ा झूला नहीं लगाया गया, लेकिन इस बार लोगों के विरोध के बावजूद नगर निगम की ओर से यहां झूले लगाने की अनुमति दे दी गई।
लोगों ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक पार्क में व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने की अनुमति किस आधार पर दी गई। उनका आरोप है कि झूला संचालक ने देर रात पार्क में प्रवेश के लिए गेट व ग्रिल तोड़ी और झूला लगाने के लिए खुदाई की, लेकिन शिकायत के बावजूद निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
लोगों ने पर्यावरण को लेकर भी निगम प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ जालंधर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 45वें स्थान पर है, वहीं दूसरी ओर हरियाली वाले सार्वजनिक पार्कों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नुकसान पहुंचाया जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पार्क को हुए नुकसान की भरपाई करवाकर झूले लगाने का मामला नहीं रोका गया तो वे इस मामले को सतर्कता विभाग और राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक ले जाएंगे। वहीं क्षेत्रवासियों ने इस मामले को लेकर विधायक बावा हैनरी से भी शिकायत की।
जब निगम ने परमिशन दी ही नहीं तो सोडल रामलीला पार्क में बड़े झूले कैसे लग गए? : विधायक बावा हैनरी
इस संबंध में विधायक बावा हैनरी ने कहा कि पार्क में बड़े व्यावसायिक झूले लगाए जाने को लेकर स्थानीय निवासियों ने पहले ही नगर निगम कमिश्नर और मेयर को लिखित शिकायत देकर विरोध जताया था। जब लोगों ने स्पष्ट तौर पर पार्क को व्यावसायिक गतिविधियों से बचाने की मांग की थी तो इसके बावजूद वहां झूले लगाने का काम कैसे शुरू हो गया?
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार झूले लगाने के लिए पार्क में गेट और ग्रिल को नुकसान पहुंचाया गया तथा झूले खड़े करने के लिए गड्ढे भी खोदे गए। यह गंभीर विषय है कि सार्वजनिक पार्क में इस प्रकार की गतिविधि किसकी अनुमति से शुरू की गई। हैनरी ने कहा कि लोगों के अनुसार झूले लगाने वाले व्यक्ति का कहना है कि उनके पास अनुमति है। लेकिन जब अनुमति की प्रति मांगी गई तो वह उपलब्ध नहीं करवा सके। दूसरी ओर नगर निगम कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि निगम की ओर से अभी तक झूले लगाने की कोई अनुमति जारी नहीं की गई है और मामला विचाराधीन है।
विधायक बावा हैनरी ने कहा कि ऐसे में सीधा सवाल है कि जब निगम ने अनुमति नहीं दी तो पार्क में झूले लगाने का काम किसके आदेश पर और किस अधिकार के तहत किया जा रहा है? उन्होंने निगम प्रशासन से मामले की जांच कर पार्क को हुए नुकसान की भरपाई करवाने की मांग की।
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