महंगी किताबें थोपने वाले निजी स्कूलों की नहीं चलेगी मनमर्जी, मानवाधिकार आयोग ने उठाया बड़ा कदम

Edited By Urmila,Updated: 26 Apr, 2026 09:28 AM

human rights commission s action

देश के निजी स्कूलों में हर साल महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एन.एच.आर.सी.) ने बड़ा कदम उठाया है।

लुधियाना (विक्की): देश के निजी स्कूलों में हर साल महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एन.एच.आर.सी.) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों पर निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव डालने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दिया है।

यह पूरी कार्रवाई नमो फाऊंडेशन की उस शिकायत के आधार पर हुई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि निजी स्कूल कमीशन के चक्कर में महंगी और भारी-भरकम किताबें थोप रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एन.एच.आर.सी. मैंबर प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने न केवल राज्यों से रिपोर्ट मांगी है, बल्कि शिक्षा मंत्रालय को भी जवाब तलब किया है।

आयोग ने इसे 'अकादमिक भेदभाव' से जुड़ा संवैधानिक सवाल माना है। आयोग का कहना है कि जब देश में एस.सी.ई.आर.टी. और एन.सी.ई.आर.टी. जैसी संस्थाएं मानक पुस्तकें तैयार करती हैं तो निजी प्रकाशकों की किताबों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है? आयोग के अनुसार, सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग सिलेबस और किताबें लागू करना भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है।

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