पंजाब के किसानों के लिए खतरे की घंटी, गर्मी ने बदला फसलों का रंग, विशेषज्ञों ने दी सलाह

Edited By Urmila,Updated: 02 Mar, 2026 04:39 PM

heat has changed the color of crops

फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत होते ही जिला गुरदासपुर में मौसम ने अचानक गर्मी वाला रुख अख्तियार कर लिया है।

गुरदासपुर (हरमन): फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत होते ही जिला गुरदासपुर में मौसम ने अचानक गर्मी वाला रुख अख्तियार कर लिया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले दो-तीन दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सैल्सियस तक दर्ज किया जा रहा है, जो सामान्य से 3 से 5 डिग्री अधिक है। रात का तापमान भी 13-15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है। इस अचानक वृद्धि ने न केवल लोगों को गर्मी महसूस करवा दी है, बल्कि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पर भी इसका असर साफ दिखाई देना शुरू हो गया है।

खेतों में गेहूं की फसल के सिट्टे (बालियां) निकल चुके हैं और इस समय दाना भरने की प्रक्रिया जारी है। परंतु तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण गेहूं की फसल का हरा रंग फरवरी के आखिरी हफ्ते से ही बदलना शुरू हो गया था, जो मार्च के पहले दिन और भी स्पष्ट हो गया है। कई खेतों में फसल जल्दी पकने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। खेती विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं के लिए दाना भरने के समय 20 से 25 डिग्री सैल्सियस तापमान सबसे उचित माना जाता है।

यदि तापमान 30 डिग्री से ऊपर चला जाए तो दाने की भराई की अवधि कम हो जाती है और दाना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। इससे हजार दानों का वजन घटता है और कुल पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि जो गेहूं अक्तूबर महीने में समय पर बीजी गई थी, वह फसल इस गर्मी को कुछ हद तक सह सकती है, क्योंकि वह अपना विकास पूरा कर चुकी है। पर जो फसल नवंबर के अंत या दिसंबर में बीजी गई थी, उस पर गर्मी का असर अधिक पड़ सकता है।

गुरदासपुर जिले में तकरीबन पौने दो लाख हैक्टेयर रकबे में गेहूं की काश्त की गई है। लगभग 80 प्रतिशत रकबे में बिजाई समय पर हो गई थी, जबकि बाकी रकबा पिछेता (देरी से) रहा। खासकर वे खेत जहां गन्ने की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई हुई, वहां फसल की वृद्धि देरी से होने के कारण मौजूदा गर्मी का असर अधिक हो सकता है। तापमान में अचानक वृद्धि के साथ गेहूं में तेला या अन्य कीटों के हमले का खतरा भी बढ़ सकता है। नमी घटने और हवा की शुष्क प्रकृति से फसल को पानी की जरूरत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई करके मिट्टी में नमी बरकरार रखें।

यदि आने वाले दिनों में भी तापमान में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो गेहूं की पैदावार में 5 से 15 प्रतिशत तक घाटे की संभावना जताई जा रही है। हालांकि मार्च के मध्य में होने वाली हल्की बारिश या पश्चिमी विक्षोभ से तापमान में कमी आने की उम्मीद भी की जा रही है, जो फसल के लिए राहत साबित हो सकती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को अपील की गई है कि वे घबराने के बजाय स्थिति पर नजर रखें। खेतों में समय-समय पर सिंचाई और कीट नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करना लाभकारी रहेगा।

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