होर्मुज संकट गहराया: गैस सिलैंडरों की किल्लत से उपभोक्ता बेहाल, सप्लाई में देरी

Edited By Vatika,Updated: 04 May, 2026 11:42 AM

gas cylinder crisis

देश में रसोई गैस को लेकर संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य

जालंधर(धवन): देश में रसोई गैस को लेकर संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच जारी गतिरोध का सीधा असर गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के सिलैंडरों की उपलब्धता में भारी कमी आई है।

20 से 25 दिनों की देरी से मिल रहा सिलैंडर
उपभोक्ताओं का कहना है कि अब गैस सिलैंडर प्राप्त करना बेहद कठिन हो गया है। बुकिंग कराने के बावजूद सिलैंडर 20 से 25 दिनों की देरी से मिल रहा है। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि बाजार में सिलैंडर न तो सामान्य दरों पर मिल रहे हैं और न ही कालाबाजारी में आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों सहित व्यावसायिक उपभोक्ता भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। उनका कहना है कि गैस की कमी के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गैस एजैंसियां इस कमी का फायदा उठाकर मनमानी कर रही हैं और अपनी सुविधा के अनुसार सप्लाई दे रही हैं।

आने वाले दिनों में गहरा सकता है और गैस संकट
वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो आने वाले दिनों में गैस संकट और गहरा सकता है। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि गैस की आपूर्ति सुचारू की जाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा प्रतिकूल असर
इसके अलावा, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। यहां गैस एजैंसियों तक पहुंच सीमित होने के कारण उपभोक्ताओं को कई-कई बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे न केवल असुविधा बढ़ रही है बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि गैस एजैंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई बार बिना सिलैंडर मिले ही लोगों को लौटना पड़ता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
 

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