Edited By Subhash Kapoor,Updated: 30 Apr, 2026 11:06 PM

आज मां छिन्नमस्ता (मां चिंतपूर्णी) और भगवान नरसिंह के पावन प्रकटोत्सव के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। इस शुभ दिन पर श्री अनंतगुरु ॐ वरुण अंतःकरण ने सभी श्रद्धालुओं को हृदय से मंगलमयी शुभकामनाएं दीं।
जालंधर : आज मां छिन्नमस्ता (मां चिंतपूर्णी) और भगवान नरसिंह के पावन प्रकटोत्सव के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। इस शुभ दिन पर श्री अनंतगुरु ॐ वरुण अंतःकरण ने सभी श्रद्धालुओं को हृदय से मंगलमयी शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह दिव्य दिवस आस्था, शक्ति और धर्म की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि मां का आशीर्वाद और भगवान नरसिंह की कृपा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने कहा कि माँ छिन्नमस्ता का दिव्य स्वरूप हमें यह गूढ़ संदेश देता है कि इच्छाएँ स्वाभाविक हैं, पर उनमें बह जाना नहीं, उनसे ऊपर उठना ही भक्ति है। जो आप पर निर्भर हैं, उनके लिए केवल शब्द नहीं, पूर्ण समर्पण और त्याग ही सच्चा प्रेम है।
जीवन का सार यही है—भोग और त्याग, दोनों के बीच स्थिर संतुलन। न आसक्ति में खोना, न जिम्मेदारियों से भागना। माँ का संदेश स्पष्ट है—
सच्ची विजय बाहर नहीं, अपने मन और भावनाओं पर नियंत्रण में है। जिस प्रकार भक्त प्रह्लाद ने अपने ही पिता हिरण्यकशिपु के विरोधपूर्ण वातावरण में रहते हुए भी अटूट आस्था के बल पर भगवान विष्णु को नरसिंह रूप में साक्षात् प्रकट कर लिया, उसी प्रकार प्रत्येक भक्त आज के समय की बाधाओं, चुनौतियों और परिस्थितियों के बीच भी अपने भीतर की श्रद्धा, शक्ति और भक्ति के माध्यम से परब्रह्म परमात्मा, हरि-हर एवं शिव-शक्ति तक अपना मार्ग प्रशस्त कर सकता है। माँ छिन्नमस्ता एवं भगवान नरसिंह सभी के जीवन में शक्ति, साहस और दिव्य मार्गदर्शन का प्रकाश प्रदान करें।