Edited By Kamini,Updated: 08 May, 2026 01:32 PM

लुधियाना के हैबोवाल और ताजपुर रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स में गोबर की लिफ्टिंग का मुद्दा गरमा गया है।
लुधियाना (हितेश/गणेश/सचिन): लुधियाना के हैबोवाल और ताजपुर रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स में गोबर की लिफ्टिंग का मुद्दा गरमा गया है। डेयरी कॉम्पलेक्स से जुड़े डेयरी संचालकों और यूनियन सदस्यों द्वारा नगर निगम ज़ोन-डी कार्यालय के बाहर पंजाब सरकार, मेयर और निगम प्रशासन के खिलाफ बड़ा और उग्र धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि निगम कार्यालय के बाहर भारी हंगामे के बीच दफ्तर के गेटों पर ताले लगा दिए गए।
धरने के दौरान डेयरी यूनियन के सदस्यों ने गोबर से भरे ट्रकों को मुख्य सड़क पर ही पलट दिया। सड़क पर फैले गोबर और गंदे पानी के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई और लोग वैकल्पिक रास्तों से गुजरते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार, निगम प्रशासन और मेयर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने पर बैठे लोगों का कहना था कि डेयरी क्षेत्रों में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डेंग्यो का गंदा पानी कई बार उनके घरों के बाहर तक जमा हो जाता है, जिससे आम जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों ने कहा कि कई इलाकों में 3-3 फुट तक गंदा पानी जमा है, जिसके कारण घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो चुका है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपने घरों के गेट तक बंद रखने पड़ते हैं। लोगों का कहना था कि बदबू और गंदगी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि सरकार गोबर को गलत तरीके से पेश कर रही है, जबकि गोबर वर्षों से कई उपयोगी कार्यों में इस्तेमाल होता आया है। उनका कहना था कि पुराने समय में लोग घरों के फर्श तक गोबर से तैयार करते थे और आज भी गांवों तथा डेयरी क्षेत्रों में इसका उपयोग कई कामों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि डेयरी संचालकों को केवल दोषी ठहराना सही नहीं है।
धरने के दौरान लोगों ने कहा कि “70 साल में पहली बार ऐसा नज़ारा देखने को मिला है” जब नगर निगम कार्यालय के बाहर इस तरह हालात बने हों और गेटों पर ताले लगाने पड़े हों। प्रदर्शनकारियों ने निगम कमिश्नर के खिलाफ भी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि वे बातचीत करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें देखते ही कार्यालय के गेट बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हम यहां अपनी बात रखने आए हैं, कोई हथियार लेकर नहीं आए। अगर प्रशासन बातचीत करना चाहता है तो खुले तौर पर करे।” प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने निगम प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
सूत्रों के अनुसार हालात को देखते हुए निगम कमिश्नर ने अधिकारियों को मौके पर बुला लिया। सीपी ऑफिस और डीसी ऑफिस से गार्जियन अधिकारी भी पहुंचे और यूनियन सदस्यों को बातचीत के लिए अंदर बुलाने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने कहा कि यूनियन के कुछ प्रतिनिधि अंदर आकर अपनी मांगें रखें, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर अंदर जाकर बातचीत करने से इनकार कर दिया। मौके पर पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा और हालात पर नजर रखी गई। हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ज़ोन-डी सराभा नगर कार्यालय का गेट नहीं खोला गया और उन्हें बाहर ही बैठाकर रखा गया। दूसरी ओर जानकारी सामने आई कि बाबा सेतावाल को भी बूढ़े नाले से जुड़ा काम बंद करने के लिए कहा गया है ।
अधिकारियों का कहना है कि धरना देना जनता का अधिकार है और प्रशासन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए क्योंकि यह संपत्ति भी जनता की ही होती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि डेयरियों में पशुओं को नहलाने और अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल नगर निगम कार्यालय के बाहर डेयरी संचालकों का धरना जारी है और पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। प्रशासन प्रदर्शनकारियों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है, जबकि डेयरी यूनियन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रही।
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