तहबाजारी फीस की कैश वसूली का खेल आया सामने, पैसे लेकर नहीं दी जाती रसीद

Edited By Sunita sarangal,Updated: 27 Apr, 2026 05:54 PM

corruption in the tahbazari department

सूत्रों के अनुसार सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया ने बीते दिनों अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख इलाकों नामदेव चौक, सर्किट हाऊस के आसपास और बस स्टैंड क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया।

जालंधर(खुराना): नगर निगम की तहबाजारी शाखा में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर अब निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। ताजा चेकिंग अभियान में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। इसी के चलते अब विभाग का काम प्राइवेट कंपनी को सौंपने की तैयारी भी तेज कर दी गई है। हाल ही में मेयर वनीत धीर और निगम कमिश्नर संदीप ऋषि के निर्देशों पर तहबाजारी शाखा में बड़ा फेरबदल करते हुए लगभग पूरे स्टाफ को बदल दिया गया। हालांकि एक सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया को उनके पद पर बरकरार रखा गया है और फिलहाल पूरी शाखा की जिम्मेदारी उन्हीं के हवाले है।

सूत्रों के अनुसार सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया ने बीते दिनों अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख इलाकों नामदेव चौक, सर्किट हाऊस के आसपास और बस स्टैंड क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान करीब 57 रेहड़ी-खोखा संचालकों से बातचीत कर तहबाजारी फीस वसूली और रसीद इत्यादि की जानकारी जुटाई गई। पता चला है कि इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कुल 57 में से केवल 7-8 दुकानदारों ने बताया कि उन्हें फीस की विधिवत रसीद दी जाती है, जबकि करीब 50 रेहड़ी-खोखा संचालकों ने ऑनरिकार्ड कहा कि उनसे नकद पैसे लिए जाते हैं और कोई रसीद नहीं दी जाती। यह रिपोर्ट तैयार कर मेयर और कमिश्नर को सौंप दी गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि तहबाजारी शाखा में लंबे समय से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा है।

कई सालों से ही उठ रहे थे सवाल, मेयर और कमिश्नर ने कसा शिकंजा

खास बात यह है कि जालंधर निगम की तहबाजारी शाखा पर कई सालों से ही सवाल उठ रहे थे। आज तक कोई भी मेयर या कमिश्नर इस शाखा से भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया। अब जाकर मेयर वनीत धीर और कमिश्नर संदीप ऋषि ने इस पर शिकंजा कसा है। सूत्रों के अनुसार, जालंधर निगम अब तहबाजारी का पूरा काम प्राइवेट कंपनी को सौंपने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। प्रस्ताव के तहत निजी कंपनी को शहर में लगने वाली सभी रेहड़ी-फड़ी का सर्वे, गिनती और फीस वसूली का जिम्मा दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि शहर में 20-25 हजार से अधिक रेहड़ी-फड़ी संचालित हो रही हैं, जिनसे निगम को सालाना करीब 20-25 करोड़ रुपए की आय होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में निगम को 2 करोड़ रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि रैवेन्यू का बड़ा हिस्सा सिस्टम में ही कहीं गायब हो रहा है। निगम प्रशासन का मानना है कि प्राइवेट कंपनी के जरिए ऑनलाइन फीस वसूली लागू करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। साथ ही फीस न देने वालों के खिलाफ रेहड़ियां जब्त करने जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा जाएगा।

फोन कॉल से भी खुलासे होने की उम्मीद

तहबाजारी ब्रांच में व्याप्त भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने लाने के लिए मेयर ने क्यू.आर. कोड लगी रेहड़ियों की सूची मंगवाकर दो महिला कर्मचारियों को रोजाना रेहड़ी चालकों से फोन पर जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी है। प्रारंभिक जांच में कई चालकों ने स्वीकार किया है कि उनसे मौके पर नकद वसूली की जाती है, लेकिन कोई रसीद या ऑनलाइन एंट्री नहीं होती। मेयर ने स्पष्ट किया है कि सभी बयान लिखित रूप में दर्ज किए जाएंगे और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर एफ.आई.आर. भी दर्ज करवाई जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले निजी कंपनी के जरिए सर्वे और स्ट्रीट वेंडिंग जोन बनाने की योजनाओं पर लाखों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में अब निगम एक बार फिर नई रणनीति के साथ सिस्टम को पूरी तरह बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वहीं जालंधर नगर निगम के मेयर वनीत धीर ने कहा कि नगर निगम की तहबाजारी ब्रांच में व्याप्त भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं, जिन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूरे स्टाफ को बदल दिया गया है और कैश वसूली से जुड़े जो रिकॉर्ड सामने आए हैं, उनकी गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एफ.आई.आर. दर्ज करवाई जाएगी। निगम में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तहबाजारी ब्रांच में पारदर्शिता लाना उनकी पहली प्राथमिकता है।

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