त्योहारों पर मिठाई खरीदने वाले सावधान! खुशी के मौके पर कहीं ले ना आएं बीमारियों की सौगात

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 29 Oct, 2026 10:57 PM

beware those buying sweets during the festive season

इस्तेमाल की हुई बासी मिठाइयों और उनकी चाशनी से दोबारा मिठाइयां तैयार करने पर बिक्री से इसे खरीदने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। आज इस मुद्दे पर शहर के विभिन्न पेट के रोगों के विशेषज्ञों, हृदय रोग विशेषज्ञ आदि से संपर्क किया...

लुधियाना (सहगल): इस्तेमाल की हुई बासी मिठाइयों और उनकी चाशनी से दोबारा मिठाइयां तैयार करने पर बिक्री से इसे खरीदने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। आज इस मुद्दे पर शहर के विभिन्न पेट के रोगों के विशेषज्ञों, हृदय रोग विशेषज्ञ आदि से संपर्क किया गया तो एक ने भी उनके पक्ष में अपना वोट नहीं दिया। सभी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जनहित में स्वास्थ्य विभाग की टीम को सक्रिय करें अथवा उन्हें बदल कर ऐसे लोगों को तैनात करे जो जनसेहत के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर काम कर सकें। 

फूड पॉइजनिंग का खतरा
पुरानी और बासी मिठाइयों में बैक्टीरिया, यीस्ट और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसी मिठाइयों को खाने से उल्टी, दस्त, पेट में तेज ऐंठन और गंभीर फूड पॉइजनिंग हो सकती है। मिठाइयों में बासीपन छुपाने और मिठाइयों को तरोताजा दिखाने के लिए कई बार खतरनाक केमिकल्स, सिंथेटिक रंग और खराब क्वालिटी की चाशनी या फैट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। 

पाचन तंत्र की खराबी
रीसाइकिल की गई मिठाइयों में फैटी एसिड और सड़ा हुआ मावा (खोया) होता है, जो आंतों में इन्फेक्शन, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं पैदा करता है। इसके अलावा प्रतिबंधित अर्थात अखाद्य रंगों और प्रिजर्वेटिव्स का बार-बार सेवन शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ाता है, जिससे लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

इम्यूनिटी कमजोर होना
दूषित और बासी खाद्य पदार्थ खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे बार-बार बीमार पड़ने का खतरा रहता है। जब तेल को बार-बार या बहुत देर तक उबाला जाता है, तो उसमें निम्नलिखित वैज्ञानिक बदलाव होते हैं उसके अलावा बेकरी के उत्पादों से भी निम्नलिखित रोग हो सकते हैं। 
 
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण  के अनुसार, तेल को बार-बार गर्म करने पर उसमें टोटल पोलर कंपाउंड्स  जमा होने लगते हैं। जब तेल में टोटल पोलर कंपाउंड का स्तर 25% से अधिक हो जाता है, तो वह तेल पूरी तरह से जहरीला हो जाता है।

भोजन में यह कैसे फैलता है?
जब आप ऐसे खराब हो चुके तेल में समोसे, पकौड़े या कोई भी वस्तु तलते हैं, तो भोजन उस गाढ़े और रासायनिक रूप से बदल चुके तेल को सोख लेता है कड़ाही में बचा हुआ तेल जितना पुराना और कड़वा होगा, उसमें बनी वस्तु उतनी ही अधिक ट्रांस फैट से भरपूर होगी। 

स्वास्थ्य पर नुकसान
इस तरह के भोजन का लगातार सेवन करने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) बढ़ता है, अच्छा कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) घटता है, धमनियां ब्लॉक होती हैं और हार्ट अटैक, लिवर डैमेज व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कृत्रिम ट्रांस फैट: वनस्पति घी, मार्जरीन, बेकरी उत्पाद (बिस्किट, कुकीज़), और डीप फ्राई किए हुए फास्ट फूड (फ्रेंच फ्राइज, बर्गर)।
सेहत को अन्य खतरे:  ट्रांस फैट पचने में कठिन होता है। यह शरीर में चर्बी बढ़ाता है जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। इसके अलावा यह शरीर की इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को बिगाड़ता है। इससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

सूजन: इसके सेवन से शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन बढ़ती है ज्यादा ट्रांस फैट खाने से लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिससे लिवर कमजोर हो सकता है।

फूड कमिश्नर विशेष टीमों की करे तैनाती
लोगों का कहना है कि त्योहारों के मौके पर फूड कमिश्नर को विशेष टीमों का गठन कर इंटरसिटी जांच मुहिम चलनी चाहिए और जो राजनेता इस मूहिम में अड़ंगा डालें जनता को उसे चुनाव में वोट से जवाब देना चाहिए क्योंकि यह जनसेहत से जुड़ा मुद्दा है इसमें समझौता किसी कीमत पर नहीं करना चाहिए।

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