Edited By Urmila,Updated: 18 Oct, 2026 09:13 AM

आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक से पैसों का लेन-देन भी आसान हो गया है। यूनिफाइड पेमैंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) के माध्यम से लोग घर बैठे मोबाइल फोन से ही पैसे भेज और प्राप्त कर रहे हैं।
जालंधर (शौरी): आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक से पैसों का लेन-देन भी आसान हो गया है। यूनिफाइड पेमैंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) के माध्यम से लोग घर बैठे मोबाइल फोन से ही पैसे भेज और प्राप्त कर रहे हैं। पे.टी.एम., गूगल पे जैसी ऐप का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति से लेन-देन करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अगर ओ.टी.पी. दे देता तो नहीं तो होना था बैंक अकाऊंट खाली हो जाना था।
हाल ही में ट्रैफिक पुलिस में तैनात एक ए.एस.आई. को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन अपनी सूझबूझ के चलते उन्होंने अपने पैसे बचा लिए। जानकारी के अनुसार, ए.एस.आई. के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति (हैकर) ने कहा कि सतनाम ने उन्हें पैसे देने के लिए कहा है। उसने ए.एस.आई. से कहा कि वह उनके गूगल पे खाते में 20 हजार रुपए भेजेगा और इसके लिए उनसे गूगल पे से लिंक मोबाइल नंबर मांगा। ए.एस.आई. ने अपना मोबाइल नंबर बता दिया। कुछ देर बाद उनके मोबाइल फोन पर एक बाहरी राज्य के नंबर से टेक्स्ट मैसेज आया, जिसमें 10 रुपए खाते में जमा होने की जानकारी दी गई। यह संदेश देखने में बैंक की ओर से पैसे जमा होने पर भेजे जाने वाले मैसेज जैसा था, लेकिन वह किसी दूसरे नंबर से भेजा गया था। इसके बाद फोन करने वाले व्यक्ति ने दोबारा कॉल कर पूछा कि क्या खाते में 10 रुपए आ गए हैं। ए.एस.आई. के हां कहने पर कुछ देर बाद एक और मैसेज आया, जिसमें 20 हजार रुपए खाते में जमा होने की जानकारी दी गई।
इसके बाद ठग ने फिर फोन कर ए.एस.आई. से गूगल पे खोलकर पैसे चैक करने को कहा। इसी दौरान ए.एस.आई. को संदेह हुआ कि फोन करने वाला व्यक्ति ठगी करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तुरंत कॉल काट दी और अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। कुछ समय बाद फोन चालू कर गूगल पे खाते की जांच की तो उसमें कोई पैसा जमा नहीं हुआ था। इस तरह ए.एस.आई. ने समय रहते सूझबूझ से संभावित ठगी से खुद को बचा लिया।
पहले भी ए.एस.आई. के खाते से हुई थी 10 लाख रुपए की ठगी
इस मामले में पता चला कि कुछ समय पहले ट्रैफिक पुलिस में तैनात एक ए.एस.आई. के बैंक खाते से 10 लाख रुपए की ठगी हुई थी। पीड़ित ए.एस.आई. ने साइबर क्राइम में शिकायत देकर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई थी। बताया गया कि ठगी से जुड़े बैंक खाते झारखंड के रांची जिले में होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, पीड़ित ए.एस.आई. को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है। रांची दूर होने के कारण वहां जाकर कार्रवाई करवाना उनके लिए मुश्किल बना हुआ है।
इस घटना से स्पष्ट है कि डिजिटल भुगतान करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना यू.पी.आई. पिन न डालें, पैसे प्राप्त करने के लिए किसी भुगतान अनुरोध को स्वीकार न करें और केवल मैसेज देखकर पैसे खाते में आने की पुष्टि न करें। वास्तविक भुगतान की पुष्टि हमेशा अपने बैंक खाते या यू.पी.आई. ऐप में बैलेंस और लेन-देन का रिकॉर्ड देखकर ही करें।
अनजान लोगों से रहें सावधान, न किसी लिंक पर क्लिक करें और न ही ओ.टी.पी. साझा करें
ठग अक्सर लोगों को झूठी बातों में फंसाकर उनका विश्वास जीत लेते हैं और फिर उनके मोबाइल फोन पर एक लिंक भेजते हैं। जैसे ही व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है, ठग उसकी निजी जानकारी चुराने या बैंक खाते तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक को बिना जांचे न खोलें।
इसके अलावा, साइबर ठग फोन कॉल के जरिए लोगों से ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड) भी मांगते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपना ओ.टी.पी. साझा कर देता है, तो उसके बैंक खाते से पैसे निकाले जाने का खतरा हो सकता है। ध्यान रखें कि बैंक कभी भी फोन कॉल या मैसेज के जरिए आपसे अपना ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी सांझा करने के लिए नहीं कहता।
यदि आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम हैल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा, भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है। जल्द शिकायत करने से संबंधित बैंक और अधिकारियों को ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने तथा खाते को फ्रीज करवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। वहीं डिजिटल लेन-देन करते समय सतर्क रहें।
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