Big News: लक्खा सिधाना को आया हार्ट अटैक! 28 अक्तूबर को हुई थी गिरफ्तारी

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 02 Nov, 2026 07:25 PM

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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता लखा सिंह सिधाना को माइनर हार्ट अटैक आने की जानकारी सामने आई है। इसकी जानकारी आज अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी के दौरान लखा सिधाना और उनके वकीलों ने दी।

मानसा: पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता लक्खा सिधाना को माइनर हार्ट अटैक आने की जानकारी सामने आई है। इसकी जानकारी आज अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी के दौरान लखा सिधाना और उनके वकीलों ने दी।

लक्खा सिधाना के वकील गुरप्रीत सिंह संधू और हरजोत सिंह मान ने बताया कि लखा सिधाना को माइनर हार्ट अटैक आया है। उन्हें छाती में दर्द हो रहा है और सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से उन्हें मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने छाती में दर्द की शिकायत की। इसके चलते वकीलों ने लखा सिधाना की मेडिकल जांच करवाने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

वकीलों ने बताया कि पुलिस लखा सिधाना का मोबाइल फोन बरामद करवाने का हवाला देकर 7 दिन का और रिमांड मांग रही थी, लेकिन उन्होंने अदालत में इसका विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि जिस दिन पुलिस ने लखा सिधाना को गिरफ्तार किया था, उस दिन मोबाइल फोन उनकी जेब में था। ऐसे में या तो फोन वहीं गिर गया होगा या फिर उनकी जेब से निकाल लिया गया होगा।

वकीलों ने पुलिस से सवाल किया कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद क्या मोबाइल फोन को ट्रेस करने या उसकी आखिरी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की गई? इस पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद अदालत ने लखा सिधाना का एक दिन का रिमांड मंजूर किया।

कब गिरफ्तार किया गया था लक्खा सिधाना?

गौरतलब है कि पुलिस ने लक्खा सिंह सिधाना को 28 अक्तूबर को डी.सी. आवास के सामने से कथित तौर पर जबरन हिरासत में लिया था। कुछ युवकों ने उनकी मदद करने की कोशिश भी की, लेकिन सिविल वर्दी में पहुंची पुलिस उन्हें खींचकर गाड़ी में डालकर ले गई। वहीं, अन्य युवकों को भी पुलिस जबरन गाड़ियों में बैठाकर ले गई थी।

पुलिस ने यह कार्रवाई गांव भंमे कलां के युवक दलजीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद बने तनावपूर्ण माहौल के दौरान की थी। दरअसल, दलजीत सिंह की मौत को ओवरडोज से हुई मौत बताया जा रहा था। इसके बाद कुछ लोग दलजीत का शव परविंदर झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए लगाए गए धरने में ले जाना चाहते थे।

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