Edited By Subhash Kapoor,Updated: 25 Oct, 2026 07:33 PM

पंजाब में नशे के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच बठिंडा जिले के अंतिम गांव डूमवाली की नर्सिंग कॉलोनी में सामने आई घटना ने नशे की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार आधी रात को एक मकान की दीवार पर ‘चिट्टा ही चिट्टा’ लिखकर...
बठिंडा (विजय वर्मा) : पंजाब में नशे के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच बठिंडा जिले के अंतिम गांव डूमवाली की नर्सिंग कॉलोनी में सामने आई घटना ने नशे की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार आधी रात को एक मकान की दीवार पर ‘चिट्टा ही चिट्टा’ लिखकर इलाके में कथित तौर पर हो रही नशा तस्करी के खिलाफ रोष जताया गया। दीवार पर लिखे इन शब्दों के माध्यम से नशे की समस्या से परेशान लोगों का गुस्सा सामने आया है।
इस मामले में नशे से पीड़ित एक मां ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में हेरोइन की पुड़ियां कथित तौर पर 200, 300 और 500 रुपये में बेची जाती हैं। महिला के इस दावे ने इलाके में नशे की उपलब्धता और इसके कारण परिवारों को पेश आ रही परेशानियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नशे की लत जहां व्यक्ति की जिंदगी को बर्बाद करती है, वहीं इसका असर पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
दीवार पर ‘चिट्टा ही चिट्टा’ लिखे जाने की घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि इलाके में नशा बिकने को लेकर लोग इस तरह के आरोप लगा रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच करना और नशे की सप्लाई के स्रोतों का पता लगाना जरूरी है। पुलिस को इलाके में निगरानी बढ़ाकर शिकायतों की जांच करनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी जरूरी है। परिवारों को बिना किसी डर के शिकायत करने का माहौल देना और नशे के कारोबार के खिलाफ लोगों के सहयोग से प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है। हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों और नशे की पुड़ियों की बताई गई कीमतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।