500 करोड़ के रक्षा सौदे में कथित रिश्वत का खेल! रामपुरा फूल के कांसल परिवार की कंपनी पर CBI का शिकंजा

Edited By Kalash,Updated: 19 Oct, 2026 05:04 PM

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देश की रक्षा खरीद व्यवस्था से जुड़े 500 करोड़ रुपये के गोला-बारूद आपूर्ति सौदे ने पंजाब के रामपुरा फूल तक हलचल मचा दी है।

बठिंडा (विजय वर्मा): देश की रक्षा खरीद व्यवस्था से जुड़े 500 करोड़ रुपये के गोला-बारूद आपूर्ति सौदे ने पंजाब के रामपुरा फूल तक हलचल मचा दी है। बठिंडा जिले के रामपुरा फूल से जुड़े कांसल परिवार की रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी SMPP लिमिटेड अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के केंद्र में है। आरोप है कि सरकारी रक्षा कंपनी म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी और निजी कंपनी के पदाधिकारी के बीच कथित सांठगांठ के जरिए रक्षा खरीद से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने और अनुचित लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा था। मामले में SMPP के CEO एवं डायरेक्टर-प्रमोटर आशीष कांसल, म्यूनिशन्स इंडिया के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार और अनिल कुमार के भाई बी. हरशवर्धन की गिरफ्तारी हो चुकी है। छापेमारी में 2.23 करोड़ रुपये नकद बरामद होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

500 करोड़ का ठेका, अब रिश्वत के आरोपों की जांच 

CBI ने 12 अक्टूबर 2026 को कथित रिश्वतखोरी और रक्षा खरीद से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के अनधिकृत खुलासे के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड के पुणे कार्यालय में तैनात कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार पर निजी ठेकेदारों और विक्रेताओं से कथित तौर पर अनुचित लाभ के बदले रिश्वत मांगने तथा संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोप हैं।
जांच का प्रमुख केंद्र SMPP लिमिटेड को मिला करीब 500 करोड़ रुपये का गोला-बारूद आपूर्ति अनुबंध है। यह अनुबंध एक वर्ष की अवधि में आपूर्ति के लिए दिया गया था। आरोप है कि आशीष कांसल इस सौदे के सिलसिले में अनिल कुमार के नियमित संपर्क में थे। CBI को संदेह है कि अनुबंध से संबंधित कथित लेन-देन में रिश्वत की भूमिका हो सकती है। हालांकि, 500 करोड़ रुपये ठेके का मूल्य है, रिश्वत की कथित रकम नहीं।

छापों में करोड़ों की नकदी, कई शहरों तक पहुंची जांच 

CBI की कार्रवाई के दौरान पुणे में अनिल कुमार से जुड़े ठिकाने से करीब 1.73 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा मैसूरु, बेंगलुरु और दिल्ली में तलाशी के दौरान लगभग 50 लाख रुपये अतिरिक्त नकद तथा जांच से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। इस तरह कुल बरामदगी करीब 2.23 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित अवैध रकम को छिपाने या स्थानांतरित करने के लिए अनिल कुमार ने अपने भाई, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों की मदद लेने की व्यवस्था की थी। इस कथित धन-प्रवाह और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

रक्षा सौदे की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचने का आरोप 

इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू केवल कथित रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन और सरकारी खरीद से जुड़ी जानकारी के अनधिकृत खुलासे का आरोप भी है। रक्षा खरीद में गोपनीय सूचनाओं का गलत हाथों में पहुंचना सुरक्षा और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। CBI यह पता लगाने में जुटी है कि क्या किसी अधिकारी ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाया और क्या इसके बदले अवैध भुगतान की व्यवस्था की गई थी।

रामपुरा फूल से जुड़ा कांसल परिवार चर्चा में 

SMPP लिमिटेड रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनी है, जो गोला-बारूद, ड्रोन तकनीक और अन्य रक्षा उत्पादों से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। रामपुरा फूल के शिव चंद कांसल के परिवार से जुड़ी इस कंपनी का नाम इतने बड़े सरकारी रक्षा आपूर्ति अनुबंध की जांच में सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी मामला चर्चा का विषय बन गया है। रक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए अनिल कुमार को 13 अक्टूबर 2026 से निलंबित कर दिया। SMPP के सरकारी रक्षा खरीद से जुड़े कारोबार पर संभावित प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन कंपनी के खिलाफ किसी अंतिम कार्रवाई का निष्कर्ष जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही निकलेगा।

अब जांच के घेरे में पूरा लेन-देन 

CBI के सामने अब कई अहम सवाल हैं—कथित रिश्वत की रकम कितनी थी, धन का स्रोत क्या था, सरकारी अनुबंध हासिल करने या उसे प्रभावित करने में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, और क्या रक्षा खरीद से जुड़ी संवेदनशील जानकारी वास्तव में अनधिकृत लोगों तक पहुंचाई गई। इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल यह मामला आरोपों और जांच के स्तर पर है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। फिर भी, 500 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी और करोड़ों की नकदी बरामदगी ने रक्षा खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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