वरियाणा डंप मामले में नगर निगम की खानापूर्ति पड़ी भारी, अब कमिश्नर पर जवाबदेही तय

Edited By Kalash,Updated: 29 Oct, 2026 10:53 AM

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वरियाणा डंप पर कूड़े के प्रबंधन में लापरवाही और पर्यावरणीय हर्जाने की बकाया राशि जमा न करवाने के मामले में अब नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय की गई है।

जालंधर (खुराना): वरियाणा डंप पर कूड़े के प्रबंधन में लापरवाही और पर्यावरणीय हर्जाने की बकाया राशि जमा न करवाने के मामले में अब नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय की गई है। पंजाब सरकार के एडजुकेटिंग ऑफिसर ने 23 सितंबर 2026 के आदेश में कुल 9.30 करोड़ रुपए के पर्यावरणीय हर्जाने में से बकाया 8.40 करोड़ रुपए जमा करवाने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की है। आदेश के बावजूद यदि निगम ने निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करवाई, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

पंजाब पोल्युशन कंट्रोल बोर्ड की शिकायत पर हुई कार्रवाई में यह भी सामने आया कि बार-बार नोटिस, सुनवाई और निर्देश मिलने के बावजूद नगर निगम वरियाणा डंप की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं कर पाया। कूड़े की सैगरीगेशन, आग से बचाव, कूड़े में से निकलते गंदे पानी के प्रबंधन और पुराने कूड़े के निपटारे में कमियां बनी हुई हैं। करोड़ों रुपए का हर्जाना लगने के बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार न होना जालंधर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।

गौरतलब है कि पोल्युशन कंट्रोल बोर्ड ने 7 जनवरी 2026 को वरियाणा डंप का निरीक्षण किया था। वहां गीले और सूखे कूड़े को अलग करने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। कूड़े के ढेरों में आग लगी हुई थी, वजन करने के लिए कांटा नहीं था और चारदीवारी या बाड़ की कमी थी। कूड़े से निकलने वाले गंदे पानी के प्रबंधन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

9 फरवरी 2026 की सुनवाई में नगर निगम के हैल्थ ऑफिसर ने चारदीवारी बनाने, पुराने कूड़े का निपटारा करने, अंडरग्राऊंड वाटर की निगरानी के लिए पीजोमीटर लगाने और गंदे पानी के प्रबंधन के लिए कदम उठाने की बात कही थी। लेकिन बोर्ड ने दर्ज किया कि निगम की ओर से कूड़ा प्रबंधन योजना पर कोई स्पष्ट प्रगति, ठोस प्रस्ताव या समय-सीमा पेश नहीं की गई। इसके बाद भी निगम को सुधार के लिए निर्देश देने पड़े।

गंदा पानी सीवर में, अंडरग्राउंड वाटर की निगरानी अधूरी

बोर्ड के निरीक्षण में कूड़े से निकलने वाला गंदा पानी कुछ जगह जमा मिला, जबकि कुछ हिस्सा सीवर में छोड़ा जा रहा था। अंडरग्राउंड वाटर की निगरानी के लिए पीजोमीटर नहीं लगाए गए थे। कूड़े के ढेरों में आग को देखते हुए मीथेन गैस का पता लगाने वाले डिटैक्टर लगाने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके अलावा काला संघियां ड्रेन और कपूरथला रोड के चौराहे के पास कूड़े का अलग ढेर भी पाया गया था, जिसे रिपोर्ट तैयार होने तक हटाया नहीं गया था।

यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास की ओर से दायर मूल आवेदन संख्या 97/2026 से भी जुड़ा है। 28 अक्तूबर को नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई होनी थी, लेकिन पीठ की बैठक नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई फरवरी 2027 में होगी।

कमिश्नर की जवाबदेही तय होने और हर्जाना जमा करवाने की समय-सीमा निर्धारित होने के बाद अब नगर निगम के सामने दोहरी चुनौती है। उसे बकाया राशि जमा करवाने के साथ वरियाणा डंप पर कूड़े की सैगरीगेशन, आग से बचाव, गंदे पानी के उपचार और पुराने कूड़े के निपटारे में ठोस सुधार भी दिखाना होगा। अब केवल आश्वासनों और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलने वाला नहीं।

9.30 करोड़ का हर्जाना, 8.40 करोड़ अभी बकाया

एडजुकेटिंग ऑफिसर के 23 सितम्बर 2026 के आदेश के अनुसार, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के उल्लंघन पर नगर निगम पर कुल 9.30 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय हर्जाना लगाया गया है।

4.50 करोड़ रुपए: 1 जुलाई 2020 से 31 मार्च 2024 तक की अवधि के लिए।

2.10 करोड़ रुपए: 1 अप्रैल 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि के लिए अतिरिक्त हर्जाना।

2.70 करोड़ रुपए: नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत अतिरिक्त हर्जाना।

कुल 9.30 करोड़ रुपए में से 90 लाख रुपए जमा करवाए गए हैं और 8.40 करोड़ रुपए बकाया हैं। आदेश में बकाया राशि जमा करवाने के लिए दो महीने की समय-सीमा दी गई है। साथ ही 25 लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करवाने या उसका रिन्यूअल करने और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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