जालंधर में दुकानदारों को मिलेगी मालिकाना हक? निगम ने फिर शुरू की ‘मेरी दुकान मेरे नाम’ स्कीम

Edited By Kalash,Updated: 24 Oct, 2026 12:13 PM

jalandhar municipal corporation meri dukan mere naam

पंजाब सरकार के निर्देशों पर नगर निगम जालंधर ने मेरी दुकान मेरे नाम स्कीम लागू करने के लिए फिर से कार्रवाई शुरू कर दी है।

जालंधर (खुराना): पंजाब सरकार के निर्देशों पर नगर निगम जालंधर ने मेरी दुकान मेरे नाम स्कीम लागू करने के लिए फिर से कार्रवाई शुरू कर दी है। मेयर वनीत धीर और निगम कमिश्नर सुरिंदर सिंह के दिशा-निर्देशों पर योग्य किरायेदारों और लंबे समय से दुकानों पर काबिज लोगों के मामलों का नियमों के अनुसार निपटारा करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए नगर निगम की तहबाजारी शाखा में आवेदन जमा करवाए जा सकते हैं।

वहीं इस स्कीम को लेकर किरायेदारों और दुकानों पर लंबे समय से काबिज लोगों के मन में कई सवाल भी हैं। उनका कहना है कि अकाली-भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार के समय भी ऐसी योजनाएं शुरू की गई थीं। उस समय भी जालंधर के बड़ी संख्या में किरायेदारों और काबिज लोगों ने अपने दस्तावेज जमा करवाए थे, लेकिन उन आवेदनों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि पुराने आवेदनों को आगे बढ़ाने के बजाय निगम स्टाफ ने उन्हें रद्दी की टोकरी में फैंक दिया। ऐसे में अब दोबारा आवेदन मांगने पर लोग यह जानना चाहते हैं कि इस बार उनकी फाइलों का निपटारा वास्तव में होगा या नहीं।

12 साल के कब्जे का देना होगा सबूत 

नगर निगम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय विभाग की एसओपी के तहत पंजाब मैनेजमेंट एंड ट्रांसफर ऑफ म्यूनिसिपल प्रॉपर्टीज एक्ट, 2020 की धारा 5 के अनुसार योग्य किरायेदारों और काबिज लोगों के मामलों पर विचार किया जाएगा।

स्कीम के तहत आवेदक को यह दस्तावेजी सबूत देना होगा कि उसका कब्जा 1 अप्रैल 2008 या इससे पहले शुरू हुआ था और 1 अप्रैल 2020 तक लगातार 12 साल तक बना रहा। केवल लंबे समय से दुकान पर कब्जा होने से अपने आप मालिकाना हक नहीं मिल जाएगा। इसके लिए आवेदक की योग्यता, दुकान की कानूनी स्थिति, बकाया राशि, आय वर्ग, 50 वर्ग मीटर से जुड़े नियमों और इमारत से संबंधित नियमों की भी जांच की जाएगी।

आवेदन के साथ पहचान और पते का सबूत, कब्जे से जुड़े दस्तावेज, अलॉटमेंट या लीज के कागजात, जहां उपलब्ध हों वहां किराये की रसीदें और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करवाने होंगे। इसके बाद योग्य मामलों में सार्वजनिक नोटिस जारी करने, आपत्तियों का निपटारा करने, कीमत तय करने और सरकार व नगर निगम हाउस की जरूरी मंजूरियां लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही मालिकाना हक बदलने और रजिस्ट्री करवाने की कार्रवाई होगी। रजिस्ट्री के बाद भी कानून के अनुसार 20 साल तक कुछ पाबंदियां लागू रहेंगी।

चुनाव आचार संहिता से पहले प्रक्रिया पूरी होना आसान नहीं 

इस स्कीम को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। किरायेदारों और काबिज लोगों का कहना है कि केवल आवेदन जमा करवाने से मालिकाना हक नहीं मिल जाएगा। इसके लिए सरकारी स्तर पर कीमत तय करने वाली कमेटी की बैठकें, कीमत निर्धारित करना, आपत्तियों का निपटारा और अलग-अलग स्तरों पर मंजूरियां लेने जैसी कई प्रक्रियाएं बाकी हैं।

ऐसे में यह देखना होगा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले नगर निगम इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर पाता है या नहीं। फिलहाल पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी होने को लेकर लोगों के मन में संदेह बना हुआ है। इसके बावजूद पात्र किरायेदार और दुकानों पर लंबे समय से काबिज लोग अपने दस्तावेज तैयार करके आवेदन जमा करवाने में लगे हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनकी फाइलों पर कार्रवाई होगी और लंबे समय से दुकानों के मालिकाना हक का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिल सकेगी।

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