Edited By Sunita sarangal,Updated: 25 Sep, 2026 04:57 PM
जिला प्रशासन 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए चुनाव की तैयारियों को और मज़बूत कर रहा है।
रूपनगर(विजय शर्मा) : जिला प्रशासन 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए चुनाव की तैयारियों को और मज़बूत कर रहा है। इसी पहल के तहत, आज जिला प्रशासनिक परिसर में संवेदनशील इलाकों और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान के बारे में सिविल और पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया गया। इस सेशन की अध्यक्षता रूपनगर के डिप्टी कमिश्नर-सह-जिला चुनाव अधिकारी आदित्य डेचलवाल ने की।
ट्रेनिंग सेशन के दौरान, डिप्टी कमिश्नर-सह-जिला चुनाव अधिकारी आदित्य डेचलवाल ने बताया कि संवेदनशील इलाकों और क्रिटिकल मतदान केंद्रों की पहचान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन इलाकों की पहचान करने पर खास ध्यान दिया जाना है जहां कमज़ोर या संवेदनशील वर्गों के मतदाताओं के प्रभावित होने का जोखिम हो - जैसे कि लालच, डर, धमकी, दबाव या अन्य तरीकों से, जिससे उनके वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने ज़ोर दिया कि डर-मुक्त और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील इलाकों की सही और निष्पक्ष पहचान बहुत ज़रूरी है। इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों को शेड्यूल 1, 2, 3, 4 और 5 से जुड़े शेड्यूल के बारे में भी जानकारी दी, जो संवेदनशीलता की पहचान और आकलन से संबंधित हैं। उन्होंने उन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी गाइडलाइंस और तय शेड्यूल के अनुसार पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करने का निर्देश दिया।
ट्रेनिंग सेशन के दौरान, ट्रेनिंग ऑफिसर-सह-स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर दिनेश सैनी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों की पहचान करने के लिए संबंधित सेक्टर ऑफिसर कम से कम तीन बार मौके पर जाकर निरीक्षण और आकलन करेंगे। इन दौरों के दौरान पुलिस सेक्टर ऑफिसर की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इस संयुक्त निरीक्षण के ज़रिए इलाके की स्थिति, मतदाताओं के सामने संभावित खतरों और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान की जाएगी।
डिप्टी कमिश्नर और ज़िला चुनाव अधिकारी आदित्य डेचलवाल ने कहा कि चुनाव सिर्फ़ वोट डालने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें हर योग्य नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार का सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी भी शामिल है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ज़िला प्रशासन का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी वोटर डर, धमकी, लालच, दबाव या किसी भी तरह के प्रभाव के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे।
डिप्टी कमिश्नर ने सिविल और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संवेदनशील इलाकों की पहचान करने की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता और निष्पक्षता से पूरा करें और अपने काम में तथ्यों और आपसी तालमेल का ध्यान रखें। उन्होंने ज़मीनी स्तर की जानकारी का बारीकी से मूल्यांकन करने और समय पर एहतियाती उपाय करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि चुनाव के दौरान हर वोटर बिना किसी डर या दबाव के सुरक्षित माहौल में वोट डाल सके।
उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना चुनाव प्रशासन की सबसे अहम ज़िम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए सभी काम तय समय-सीमा के भीतर पूरे करें।
ट्रेनिंग के दौरान मौजूद सेक्टर अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों की पहचान से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक जवाब दिया। इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने के मकसद से अधिकारियों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस मौके पर चुनावी पंजीकरण अधिकारी प्रदीप सिंह बैंस (श्री चमकौर साहिब), जसप्रीत सिंह (रूपनगर) और सुखपाल सिंह (श्री आनंदपुर साहिब), एस.पी. हरमीत सिंह, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जशनदीप सिंह मान (श्री आनंदपुर साहिब) और मंजीत सिंह औलख (श्री चमकौर साहिब), इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह और पवन कुमार, चुनाव तहसीलदार पलविंदर सिंह, और चुनाव विभाग के सभी सेक्टर अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
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