Edited By Sunita sarangal,Updated: 10 Jun, 2026 02:34 PM

जानकारी देते अतुल अरोड़ा ने बताया कि उसकी भाभी 9 महीने की गर्भवती है।
लुधियाना(तरुण): गत रात्रि एक गर्भवती महिला के पेट में 9 महीने के बच्चे की मौत को लेकर परिजनों ने अस्पताल के भीतर और बाहर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि डाक्टर की लापरवाही के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हुई है। इस कारण गुस्साए परिजनों ने अस्पताल और डाक्टर के लाइसैंस को रदद करने की मांग की है। सूचना मिलने के बाद थाना डिवीजन नंबर 3 की पुलिस मौके पर पहुंची।
जानकारी देते अतुल अरोड़ा ने बताया कि उसकी भाभी 9 महीने की गर्भवती है। गर्भवती होने के बाद और उससे पूर्व भी उसकी भाभी द्वारा इलाके के अरोड़ा नर्सिंग होम में चैकअप और इलाज करवाया जा रहा था। प्रत्येक महीने उसकी भाभी को चैकअप के लिए बुलाया जाता था।
नौवां महीना होने के कारण 4 जून, 6 जून को भी उसकी भाभी का चैकअप हुआ। डाक्टरों ने जच्चा और बच्चा दोनों को स्वस्थ बताया। 9 जून की शाम को लेबर पेन होने पर रुटीन चैकिंग के लए उसकी भाभी अरोड़ा नर्सिंग होम गई, जहां डाक्टर ने बताया कि स्कैन मशीन खराब है, दूसरे अस्पताल से स्कैन करवाकर लाएं। इसके बाद वे इलाके के एक अस्पताल में गए और स्कैन करवाई। रिर्पोट देखने के बाद उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। डाक्टर ने बताया कि 3 दिन पहले ही पेट में 9 महीने के बच्चे की मौत हो गई।
गर्भवती महिला के भाई विशाल कुमार ने बताया कि डाक्टर से जब बच्चे की मौत का कारण पूछा तो उल्टा अस्पताल का प्रशासन और डाक्टर उनसे ही कठोर रवैय्या अपनाकर बात करने लगा। अस्पताल के डाक्टर ने शराब का सेवन किया हुआ था।
पीड़ित विशाल कुमार का कहना है कि उसकी बहन के साथ ऐसा दूसरी बार हुआ है। 2 वर्ष पहले भी इसी अस्पताल में 3 महीने की गर्भवती उसकी बहन के उपचार दौरान पेट में पल रहे बच्चे की मौत हुई थी। उस वक्त उन्हें समझ नहीं आया था। परंतु अस्पताल प्रशासन खुद को बचाने के लिए उनसे कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर खुद को सुरक्षित कर लेते हैं। परंतु पहले और दूसरी बार दोनों केस में डाक्टर की लापरवाही के कारण ही उसकी बहन के गर्भ में पल रहे दोनों बच्चे की मौत हुई है।
पीड़ित अतुल कुमार और विशाल कुमार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और डाक्टर की लापरवाही से उनके पारीवारिक सदस्य की गर्भ में मौत हुई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि डाक्टर और अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज हो। डाक्टर का लाइसैंस रदद हो अन्यथा वे धरना प्रर्दशन कर इंसाफ की मांग करेंगे। भीड़ उग्र होकर अस्पताल में किसी प्रकार की तोड़फोड़ या अन्य किसी प्रकार का नुकसान होता है तो इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
इस सबंधी थाना प्रभारी अमरजीत सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि अरोड़ा नर्सिंग होम में गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत से संबंधित शिकायत उन्हें मिली है। बच्चे का पोस्टमार्टम होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। गर्भपात के बाद बच्चे का शव कहां है, इस बारे में उन्हें जानकारी नही है। वे वी.आई.पी. ड्यूटी में व्यस्त है। फिलहाल शिकायतकर्ता को थाने बुलाया गया है, जिनसे बातचीत की जाएगी।
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