Edited By Vatika,Updated: 28 May, 2026 09:58 AM

इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (एलआईटी) की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के चलते जनता के टैक्स की करोड़ों-अरबों रुपए
लुधियाना(राज): इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (एलआईटी) की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के चलते जनता के टैक्स की करोड़ों-अरबों रुपए की कमाई किस कदर मिट्टी में मिल रही है, इसका जीता-जागता सबूत शहर के सबसे पॉश और व्यस्त कारोबारी इलाके रानी झांसी रोड पर देखने को मिला है। यहां बनी ट्रस्ट की 197 करोड़ रुपए की आलीशान बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंग को खरीदने के लिए लगातार दूसरी बार भी कोई खरीददार सामने नहीं आया। अरबों रुपए की इस प्राइम प्रॉपर्टी की नीलामी में एक भी बोलीदाता का न पहुंचना ट्रस्ट के अधिकारियों के दावों की हवा निकाल रहा है और उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
18 साल से वीरान पड़ी है 2.22 एकड़ की यह 'गोल्डन' प्रॉपर्टी
हैरानी की बात यह है कि करीब 2.22 एकड़ में फैली इस विशाल और भव्य इमारत को बने लगभग 18 साल का लंबा अरसा बीत चुका है, लेकिन आज तक इस इमारत का नसीब नहीं जागा। देखरेख के अभाव में आज यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति बदहाली के आंसू रो रही है। पूरी इमारत में चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, खिड़कियों के शीशे और दरवाजे टूट चुके हैं और दिन के उजाले में भी यह इमारत किसी भूतिया खंडहर जैसी नजर आती है। पहले अधिकारियों ने इसे किराए पर देकर मलाई खाने की योजना बनाई थी, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सरकारी खजाना भरने के लिए इसे बेचने का फैसला लिया गया। मगर अफसोस, आज की तारीख में कोई भी बड़ा निवेशक इस सफेद हाथी पर दांव लगाने को तैयार नहीं है।
रिजर्व प्राइस का 'भूत' और अधिकारियों की जिद पड़ी भारी ;
सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार द्वारा सरकारी विभागों की खाली पड़ी प्राइम प्रॉपर्टीज को बेचकर राजस्व जुटाने के सख्त निर्देशों के बाद ही एलआईटी ने इस बिल्डिंग को बेचने की फाइल दोबारा खोली थी। लेकिन अधिकारियों की जिद और बाजार की जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ना भारी पड़ गया। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मार्केट में चल रही मंदी के बावजूद इस बिल्डिंग का रिजर्व प्राइस (न्यूनतम कीमत) इतना ज्यादा रखा गया कि बड़े से बड़ा व्यापारी भी पीछे हट गया। यहां बता दे कि कांग्रेस सरकार के समय इसकी कीमत घटाकर 154 करोड़ रुपए भी की गई थी, लेकिन तब भी कोई खरीदार इसे हाथ लगाने को राजी नहीं हुआ था। इसके बावजूद अफसरों ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया।
77 यूनिट्स का विशाल साम्राज्य, अब डीसी के पाले में गेंद
मामले की पुष्टि करते हुए ट्रस्ट के चेयरमैन तरसेम भिंडर ने साफ किया कि इस बार की नीलामी में एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, जो कि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि अब बिल्डिंग का रिजर्व प्राइस कम करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव तैयार कर डिप्टी कमिश्नर (डीसी) को भेजा जाएगा। चूंकि रेट फिक्सेशन कमेटी के सर्वेसर्वा डीसी ही हैं, इसलिए अब अंतिम फैसला उन्हीं के स्तर पर लिया जाएगा। आपको बता दें कि इस बहुमंजिला इमारत में डबल बेसमेंट पार्किंग के साथ कुल 77 वीआईपी यूनिट्स बनाई गई हैं, जिनमें बड़े रेस्टोरेंट, बैंक, लग्जरी शोरूम, दुकानें और आलीशान पेंटहाउस शामिल हैं। शहर के दिल कहे जाने वाले रानी झांसी रोड पर स्थित होने के बावजूद इस इमारत का बरसों से खाली पड़े रहना यह साबित करने के लिए काफी है कि सरकारी योजनाएं और संपत्तियों का प्रबंधन किस कदर फ्लाप साबित हो रहा है।