Edited By Sunita sarangal,Updated: 13 Jul, 2026 04:51 PM

अकसर यह सुनने में आता है कि इंसान जहां पहुंच जाता है वहां प्रकृति का नुकसान होना मुमकिन है।
पंजाब डेस्क : अकसर यह सुनने में आता है कि इंसान जहां पहुंच जाता है वहां प्रकृति का नुकसान होना मुमकिन है। जैसे कि पहाड़ों पर जब टूरिस्ट घूमने जाते हैं तो वहां कचरा फैला देते हैं अगर बीच पर जाते हैं तो समुद्र में कचरा फेंक देते हैं। कई बार प्रशासन की लापरवाही तो कई बार प्रयटकों की अनदेखी प्रकृति की खूबसूरती को खराब कर देती है। ऐसे में जब से अमरनाथ यात्रा शुरू हुई तब से रास्ते में या पवित्र गुफा तक कोई कचरा या गंदगी न फैले और सभी तीर्थयात्री साफ, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में यात्रा पूरी करें इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ बनाने के लिए कमर कस ली है।
बालटाल और पहलगाम मार्गों पर सफाई टीमें तैनात
जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को पूर्ण रूप से कचरा मुक्त करने के लिए बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर कई टीमें भी तैनात की हैं जो यात्रियों को कचरा फैलाने से रोकेंगी और कचरे को डस्टबिन को डालने की अपील करेंगी और यात्रा मार्गों की साफ-सफाई भी रखेंगी। यात्रा मार्गों पर फैलने वाले कचरे का पूरी तरह से निपटारा भी किया जाएगा। इसके तहत सभी कचरे को संसाधन में बदला जा रहा है।
प्लास्टिक के कचरे को कम करने के लिए लगाए गए Water ATM
प्लास्टिक का कचरा अकसर हर जगह देखने को मिलता है ऐसे में इस कचरे के निपटारे के लिए जगह-जगह वाटर ए.टी.एम. लगाए गए हैं ताकि प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल कम हो सके। जानकारी के अनुसार यात्रा मार्गों पर 8 वाटर ए.टी.एम. लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को पानी की कमी न हो और वे प्लास्टिक की पानी की बोतलों का भी कम से कम प्रयोग करें।
जगह-जगह लगाए गए Dustbin
इसके अलावा बालटाल और पहलगाम दोनों यात्रा मार्गों पर जगह-जगह डस्टबिन भी लगाए गए हैं। तीर्थयात्रियों से समय-समय पर कचरे को डस्टबिन में डालने की भी अपील की जा रही है ताकि ठोस व तरल कचरे का पूर्ण रूप से प्रबंधन किया जा सके। इसके अलावा रिसाइकिल होने वाले प्लास्टिक, कागज आदि के कचरे को रिसाइक्लिंग प्रक्रिया द्वारा फिर से इस्तेमाल में लाया जाएगा।
जैविक कचरे से बनेगी बायोगैस और कम्पोस्ट
यात्रा मार्ग पर चलने वाले जानवरों के गोबर से बायोगैस बनाई जाएगी। 20 हजार से ज्यादा खच्चरों के गोबर को मशीनों से इकट्ठा किया जा रहा है और बाद में इनसे बायोगैस बनाई जाएगी। इसके लिए बायोगैस प्लांट भी स्थापित किया गया है ताकि इकट्ठा हुए गोबर से मीथेन गैस बनाई जा सके। इसके अलावा किसी भी प्रकार के जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार किए जाएंगे।
700 मीट्रिक टन कचरे का होगा निपटारा
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष की यात्रा दौरान करीब 700 मीट्रिक टन कचरा निकलेगा। इसके निपटारे के लिए प्रशासन पूर्ण रूप से तैयार है। बालटाल और पहलगाम दोनों यात्रा मार्गों पर तैनात की गई सफाई टीमें समय-समय पर कचरे को इकट्ठा करेंगी। ठोस व तरल कचरे को इकट्ठा कर हाई-एंड मशीनों के जरिए उनका वैज्ञानिक रूप से निपटारा किया जाएगा।
अमरनाथ यात्रा बनेगी देश की पहली ‘Zero Landfill Pilgrimage’
जानकारी के अनुसार 3 जुलाई से जब से तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए यात्रा शुरू की है तब से लेकर अब तक कचरे का पूर्ण रूप से प्रबंधन किया जा रहा है। बालटाल और पहलगाम दोनों यात्रा मार्गों पर किसी भी प्रकार का कचरा नहीं फैलने दिया जा रहा। प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि अमरनाथ यात्रा देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ बनेगी।
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