हाल-ए-सिविल अस्पतालः रात 11 बजे तक ड्यूटी पर नहीं पहुंचा नर्सिंग स्टाफ, मरीज परेशान

Edited By Sunita sarangal,Updated: 24 Oct, 2019 09:26 AM

irresponsibility of nursing staff in civil hospital

मर्जी से आता है नर्सिंग स्टाफ

जालंधर(अमित शौरी): हमेशा ही चर्चाओं में रहने वाले सिविल अस्पताल में कोई कायदा-कानून नहीं है। अपनी मर्जी से यहां कुछ स्टाफ व डाक्टर आकर मरीजों का चैकअप करते हैं। बेशक अकाली-भाजपा सरकार हो चाहे कांग्रेस सरकार हो, पर अस्पताल में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा ही एक ताजा मामला बुधवार रात को सिविल अस्पताल में स्थापित जच्चा-बच्चा अस्पताल के लेबर रूम में देखने को मिला जिसमें रात 8 बजे से लेकर करीब 11 बजे तक कोई नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर नहीं आया जिस कारण गर्भवती महिलाएं परेशान होती रहीं। 

जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा अस्पताल के लेबर रूम में 2 नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी बुधवार रात 8 बजे शुरू होनी थी परन्तु रात 11 बजे तक कोई भी स्टाफ सदस्य ड्यूटी पर नहीं पहुंचा। इस दौरान कई गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा से परेशान होती रहीं और उनके परिजनों ने इस बात को लेकर विरोध तक जताया तथा हंगामा भी किया। गुस्साए लोगों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में फ्री के नाम पर लोगों को परेशानियां ही मिलती हैं तथा उनकी सुनवाई नहीं होती। वहीं बताया जा रहा है कि लेबर रूम में 2 स्टाफ नर्सें तैनात होती हैं परन्तु पता नहीं चला किस वजह से दोनों स्टाफ नर्सें ड्यूटी में नहीं पहुंचीं। वहीं अस्पताल के डाक्टर भड़के लोगों को शांत करते देखे गए।
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नर्सिंग छात्राओं ने संभाली वार्ड की कमान
अस्पताल में काफी देर तक स्टाफ न पहुंचने के कारण वार्ड के मरीजों की देखभाल नर्सिंग छात्राओं ने संभाली तथा लोगों को शांत करती दिख रही थीं। हालांकि उनकी ड्यूटी यह नहीं थी परन्तु फिर भी वह लोगों की मदद के लिए आगे आईं।

बधाई को लेकर चर्चा में रहा सिविल अस्पताल 
गौरतलब है कि इससे पहले भी यहां कई मामले सुर्खियों में आ चुके हैं जब डिलीवरी के बाद स्टाफ के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व नर्सें बच्चा होने के बाद बधाई मांगते हैं। इस बात को लेकर कई बार अस्पताल में हंगामा तक देखने को मिला है तथा इस बाबत मैडीकल सुपरिटैंडेंट के पास शिकायतें भी पहुंची थीं। आखिरकार अस्पताल प्रबंधकों ने लेबर रूम के बाहर पोस्टर तक चिपका दिए थे जिन पर लिखा था कि अस्पताल के किसी स्टाफ को बधाई न दी जाए। परन्तु हालात जस के तस बने हुए हैं। लोगों की मांग है कि विजीलैंस विभाग अस्पताल में कोई कार्रवाई करे ताकि सिविल अस्पताल भ्रष्टाचार मुक्त हो सके।

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