सेना में पंजाबियों की कम हो रही संख्या ;चिंता का विषय : ब्रिगेडियर काहलों

Edited By swetha,Updated: 25 Feb, 2020 01:10 PM

brigadier kahlon

प्रतिभावान इच्छुक नौजवानों के लिए सिखलाई कैंप चलाए जाएं

गुरदासपुर: देश के विभाजन से पूर्व सेना में भर्ती करने वाले अधिकारी देश का दाहिना हाथ समझे जाते पंजाब के गांवों में पहुंच कर जैलदारों व नम्बरदारों के सहयोग से सेहतमंद गबरूओं को स्वयं भर्ती करके ले जाते थे। अफसोस की बात तो यह है कि भर्ती के चाहवान लड़के नशे की राह में पड़ रहे हैं तथा भर्ती दौरान सेना की निर्धारित शर्तें ही पूरी नहीं करते। 
उक्त विचार आल इंडिया डिफैंस ब्रदरहुड एसोसिएशन रजिस्टर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह काहलों ने पैतृक जिला का दौरा करने दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सेना में पंजाबियों की कम हो रही संख्या ङ्क्षचता का विषय है। दुश्मन की यही रणनीति है कि पंजाब में नशों का जाल फैला दें ताकि नौजवान सेना में भर्ती होने के काबिल ही न रहें। कई पुलिस अधिकारियों व अनवर मसीह जैसे राजनीतिज्ञ नशे के कारोबार में फंसे हैं, तदापि मगरमच्छ तो काबू ही नहीं आ रहे। 

प्रतिभावान इच्छुक नौजवानों के लिए सिखलाई कैंप चलाए जाएं
सर्वहिंद सैनिक भाईचारा ने पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह से आग्रह किया है कि वह गाॢडयन ऑफ गवर्नैंस विभाग व सैनिक भलाई को आदेश देकर संयुक्त तौर पर एकजुट होकर स्कूलों, कालेजों में पहुंच कर विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए कहें और प्रतिभावान इच्छुक नौजवानों के लिए सिखलाई कैंप चलाए जाएं। 

पूर्व पंजाबी अधिकारियों का सेना में अनुपात अन्य राज्यों से अधिक था 
उन्होंने कहा कि काफी समय पूर्व पंजाबी अधिकारियों का सेना में अनुपात अन्य राज्यों से कहीं अधिक था, परंतु अब ग्राफ नीचे की तरफ जा रहा है जोकि ङ्क्षचता का विषय है। इसका प्रत्यक्ष अनुमान इस बात से लगाया जा रहा है कि गत वर्ष आफिसर ट्रेनिंग अकादमी गया से 427 कैडेट कमिशन प्राप्त कर पास आऊट हुए। उनमें सबसे अधिक 53 कैडेट उत्तर प्रदेश, 51 हरियाणा, 36 बिहार, 26 उत्तराखंड, 25 दिल्ली, 20 महाराष्ट्र, 15 हिमाचल व पंजाब के कुल 14 ही थे जबकि अन्य दूसरे राज्यों से थे। 

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