Edited By Kamini,Updated: 12 Jun, 2026 05:48 PM

पति की पेंशन के लाभ को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है।
पंजाब डेस्क : पति की पेंशन के लाभ को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। हाईकोर्ट का कहना है कि, पति की पहली पत्नी के जीवित रहते हुए उसकी दूसरी पत्नी को पेंशन लेने का कोई हक नहीं है। हाईकोर्ट ने एक केस का फैसला सुनाते हुए कहा कि मृतक कर्मचारी की पहली पत्नी होते हुए दूसरी पत्नी को उसकी विधवा नहीं माना जा सकता और न उसे पेंशन की मांग करने का हक है।
आपको बता दें कि, प्रिया निवासी मोहाली द्वारा दायर एलपीए की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने उक्त टिप्पणी की है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत व्यक्ति की दूसरी तभी मान्य होती है जब वह कानूनन वैध हो। पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी पत्नी का मृतक की पेंशन पर कोई अधिकार नहीं है।
क्या है पूरा मामला
मोहाली निवासी मेजर हरि सिंह की मौत के बाद उसकी पहली पत्नी मोहिंदर कौर और दूसरी पत्नी प्रिया के बीच सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके चलते पहली पत्नी मोहिंदर कौर ने दीवानी कोर्ट ने याचिका दायर की और अपने पति सेवानिवृत्ति का लाभ का अधिकार मांगा। इस दौरान कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें कानूनी पत्नी माना। इसके बाद कोर्ट ने विवाह संबंधी साक्ष्यों और एक वसीयत के आधार पर प्रिया को भी कानूनी पत्नी मान लिया था। इसके बाद कोर्ट के इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस दौरान कोर्ट ने फैसला पहली पत्नी महिंदर कौर के हक में कर दिया। लेकिन प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां पर उसे राहत नहीं मिली जिसके चलते 2006 में इस अपील को खारिज कर दिया गया।
यही नहीं इसके बाद प्रिया ने फैमिली पेंशन में हिस्सेदारी की मांग की और कहा कि, चाहे उन्हें पत्नी की दर्जा नहीं मिला लेकिन केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के नियम 54(7) के तहत उन्हें सह-विधवा मानकर पारिवारिक पेंशन का हिस्सा दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि, इस लाभ भी उन्ही महिलाओं को मिलेगा जोकि कानूनन पत्नी है और जिनका विवाह कानूनन वैध है। कोर्ट ने कहा कि, विधवा का मतलब ही वैध पत्नी से है। कोर्ट में खंडपीठ ने कहा कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी नहीं कर सकते। सरकार सेवकों के लिए लागू नियमों के तहत इस पर रोक लगाते हैं।
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