Edited By Urmila,Updated: 31 May, 2026 01:49 PM

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बहने वाली रावी नदी ने पिछले साल आई भयानक बाढ़ के दौरान कई गांवों में भारी तबाही मचाई थी।
बमियाल/दीनानगर (हरजिंदर सिंह गोराया) : भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बहने वाली रावी नदी ने पिछले साल आई भयानक बाढ़ के दौरान कई गांवों में भारी तबाही मचाई थी। जिसके कारण नरोट जैमल सिंह ब्लॉक के कई गांव बाढ़ के पानी का शिकार हुए थे। इस दौरान फसलों और सड़कों को बहुत नुकसान हुआ था, जिसके कारण लोगों को लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। बाढ़ के बाद पंजाब सरकार और अधिकारियों ने रावी के किनारों पर तटबंधों को मजबूत करने और नए सुरक्षा इंतजाम करने के लिए बड़े-बड़े ऐलान किए थे।
हालत यह थी कि जब सीमावर्ती गांव कोहलियां और नदी के किनारे बसे पम्मा गांव इस नदी में समा गए थे, तो पंजाब सरकार ने रावी नदी का तटबंध तुरंत बनाने का दावा करते हुए कहा था कि यह तटबंध जल्द ही बनाया जाएगा ताकि आने वाले समय में इन गांवों को बचाया जा सके। लेकिन इस तटबंध का काम सिर्फ दो महीने चला और उस दौरान एक कच्चा तटबंध बनाया गया और अधूरा ही छोड़ दिया गया।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि एक साल बीत जाने के बावजूद कई जगहों पर तटबंधों की मरम्मत या मजबूती का काम पूरा नहीं हुआ है। अब एक बार फिर बारिश का मौसम शुरू हो गया है और बॉर्डर के गांवों के लोग डर के साए में जी रहे हैं। गांव वालों को चिंता है कि अगर रावी में पानी का लेवल फिर से बढ़ा तो पिछले साल जैसे हालात फिर से हो सकते हैं और चूंकि धुस्सी तटबंध अब तक नहीं बना है, इसलिए इलाके के करीब 40 गांवों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
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