यूक्रेन से बलटाना पहुंची रिया ने सुनाई आपबीती, 'सायरन बजते ही सहम जाते थे दिल...

Edited By Vatika,Updated: 05 Mar, 2022 04:24 PM

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बलटाना निवासी बंगा परिवार के लिए शुक्रवार खुशियों भरा रहा जब बेटी रिया यूक्रेन से सकुशल लौट आई। रिया ने बताया कि

चंडीगढ़(आशीष): बलटाना निवासी बंगा परिवार के लिए शुक्रवार खुशियों भरा रहा जब बेटी रिया यूक्रेन से सकुशल लौट आई। रिया ने बताया कि 24 फरवरी से पहले सामान्य रूप से यूनिवर्सिटी में सैकेड ईयर मैडीकल में पढ़ाई कर रही थी। युद्ध के बादल मंडराते देख प्रोफैसर से बातचीत की तो सामान्य युद्ध बता बात समाप्त कर दी, लेकिन हालत ठीक होते नजर नहीं आए। रिया ने कहा कि सायरन बजते ही हर कोई सहम जाता था और विश्वविद्यालय के बंकर में भेज दिया जाता था । साथ ही सभी सुविधाएं बंद कर दी जाती थी। यही नहीं खाने के लिए भी स्वयं इंतजाम करना पड़ता था।  छात्रों ने मिलकर जब विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर दबाव बनाया कि देश भेजने की आज्ञा दें तो अपने स्तर पर देश छोडऩे को कहा। विश्वविद्यालय ने अधिक कीमत पर किराया वसूल कर हंगरी के बार्डर पर छोड़ा। इस दौरान किसी भी छात्र की आखों में नींद नहीं बल्कि तनाव था। हर किसी को घर जाने की इच्छा थी।

साथियों से बिछडऩे के कारण तनाव में आ गई थी
रिया ने बताया कि साथियों से बिछडऩे के कारण और अधिक तनाव में आ गई थी, लेकिन दूसरे साथियों ने हौसला बढ़ाया। हंगरी बार्डर पर साथियों से मिल सकी, जहां पर भारतीय दूतावास के लोगों ने रहने और खाने का उचित प्रबंध किया हुआ था। जब तक जहाज में बैठकर दिल्ली नहीं पहुंचे तब तक चैन नहीं आया। उसने बताया कि पहली बार डर का सामना नजदीक से किया, लेकिन सभी भारतीय छात्र एकजुट दिख रहे थे जिस कारण हौसला बढ़ता गया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में 26 फरवरी की सायं पहली बार बंकर देखे, जहां ना बैठने और ना ही खाने का उचित प्रबंध था। यूक्रेन के सूमो राच्य में अभी छात्र फं से हुए हैं जिनके पास ना बार्डर तक आने के लिए साधन है और ना ही खाने का सामान। हंगरी में जो मदद मिली उसके लिए भारत सरकार का धन्यवाद, लेकिन यूक्रेन में मिलती तो बेहतर होता।

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