मोदी सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोला, मान सरकार ने विकास पर लगाया ताला: तरुण चुघ

Edited By Kamini,Updated: 07 Aug, 2026 05:17 PM

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि आज पंजाब की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि भगवंत मान सरकार की नीयत, नीति और निष्पादन की विफलता है।

पंजाब डेस्क : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि आज पंजाब की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि भगवंत मान सरकार की नीयत, नीति और निष्पादन की विफलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए 'बीज से बाजार' (Seed to Market) तक पूरी वैल्यू चेन विकसित की है। फसल विविधीकरण, पराली प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बैंक ऋण, स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म उद्योगों और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व निवेश किया है। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी की सरकार अपनी प्रशासनिक अक्षमता और कमजोर क्रियान्वयन के कारण इन ऐतिहासिक अवसरों को पंजाब के किसानों तक पहुंचाने में विफल रही है।

तरुण चुघ ने कहा कि राज्यसभा में उनके द्वारा उठाए गए 2 महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंजाब के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी गई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2022-23 से 2025-26 के दौरान फसल विविधीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए पंजाब को 1,246.25 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जिनमें से 974.41 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए। लेकिन हैरानी की बात है कि पंजाब सरकार इनमें से केवल 827.12 करोड़ रुपए ही खर्च कर सकी। चुघ ने कहा कि यह आंकड़े स्वयं बता रहे हैं कि केंद्र सरकार किसानों के लिए खजाना खोल रही है, जबकि भगवंत मान सरकार उपलब्ध धन का भी उपयोग नहीं कर पा रही। जिस सरकार से मिले हुए संसाधन तक खर्च नहीं हो रहे हों, वह किसानों के भविष्य को कैसे बदल सकती है?

चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पराली को समस्या नहीं बल्कि संसाधन बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। किसानों को आधुनिक मशीनरी पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, कस्टम हायरिंग सेंटरों को 80 प्रतिशत तक सहायता तथा बायो-सीएनजी, बायो-एनर्जी और अन्य औद्योगिक उपयोगों के लिए पराली की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने हेतु 65 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही धान पर निर्भरता कम करने और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक फसल विविधीकरण कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार स्वयं नियमित समीक्षा बैठकों और अंतर-मंत्रालयी समिति के माध्यम से इन योजनाओं की निगरानी कर रही है, लेकिन पंजाब सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे।

तरुण चुघ ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी मोदी सरकार ने पंजाब को केवल योजनाएं नहीं दीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया है। वर्ष 2014 से पहले पंजाब में केवल 8 फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को मंजूरी मिली थी, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 49 नई इकाइयों को मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत पंजाब में 79 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनकी कुल लागत 1,663.76 करोड़ रुपए है। इन परियोजनाओं के लिए 454.98 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई तथा 378.62 करोड़ रुपए पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह निवेश केवल उद्योग लगाने के लिए नहीं, बल्कि किसानों की उपज का मूल्य बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजित करने और पंजाब को एग्रो-प्रोसेसिंग हब बनाने के लिए किया गया है।

चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत पंजाब में 3,506 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को स्वीकृति मिली, लगभग  1,309 करोड़ रुपए की परियोजनाएं विकसित हुईं, बैंकों ने लगभग 990 करोड़ रुपए के ऋण स्वीकृत किए, 1,404 स्वयं सहायता समूहों को सीड कैपिटल उपलब्ध कराया गया तथा पटियाला में इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया। इतना ही नहीं, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी केंद्र सरकार ने बनाई। चुघ ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के लिए उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी आर्थिक श्रृंखला तैयार कर दी है, लेकिन पंजाब सरकार इस अवसर को भी जमीनी सफलता में बदलने में विफल रही।

तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन पंजाब को केवल गेहूं और धान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है। केंद्र सरकार लगातार धन, तकनीक, उद्योग, बाजार और नीतिगत समर्थन उपलब्ध करा रही है, लेकिन भगवंत मान सरकार के पास न तो इन योजनाओं को लागू करने की गंभीरता दिखाई देती है और न ही किसानों की आय बढ़ाने का कोई स्पष्ट रोडमैप। चुघ ने कहा कि पंजाब की जनता अब यह स्पष्ट रूप से देख रही है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के विकास, किसानों की समृद्धि और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अपना खजाना खोल रही है, जबकि दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की सरकार अपनी प्रशासनिक अक्षमता और राजनीतिक प्राथमिकताओं के कारण विकास के इन ऐतिहासिक अवसरों पर ताला लगाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान मेहनत में पीछे नहीं है, उसे पीछे धकेल रही है राज्य सरकार की नाकामी। यदि भगवंत मान सरकार केंद्र की योजनाओं को पूरी पारदर्शिता, गंभीरता और समयबद्ध तरीके से लागू करे तो पंजाब एक बार फिर देश का सबसे समृद्ध कृषि एवं एग्रो-इंडस्ट्रियल राज्य बन सकता है।

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