DA मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तरुण चुघ का वार—'कर्मचारी विरोधी सरकार की खुल गई पोल'

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 03 Aug, 2026 07:16 PM

tarun chugh welcomes high court s verdict in da case

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक अहम फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश भगवंत मान सरकार के कर्मचारी-विरोधी और कर्ज में डूबे कुशासन का आईना है।

चंडीगढ़ :  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक अहम फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश भगवंत मान सरकार के कर्मचारी-विरोधी और कर्ज में डूबे कुशासन का आईना है। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की उन अपीलों को खारिज करते हुए राज्य के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता (DA) बकाया अगले 15 दिनों के भीतर चुकाने का सख्त आदेश दिया है, और चेतावनी दी है कि देरी होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। चुग ने कहा कि इस आदेश से सरकार पर करीब Rs. 14,191 करोड़ की देनदारी बनती है, और महीने के अंत तक अदालत में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी — यह इस बात का सबूत है कि सरकार पांच साल से अपने ही कर्मचारियों को धोखा दे रही थी।

चुग ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि खंडपीठ ने भगवंत मान सरकार की 'विज्ञापनजीवी' कार्यशैली पर भी करारी चोट की है। उन्होंने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जब तक कर्मचारियों का यह बकाया पूरी तरह नहीं चुक जाता, तब तक राज्य सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने के विज्ञापन अभियानों जैसे किसी भी 'अनुत्पादक व्यय' पर एक रुपया भी खर्च नहीं करेगी। चुग ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार की सबसे बड़ी 'उपलब्धि' अब तक सिर्फ अपनी झूठी वाहवाही लूटने वाले विज्ञापनों पर करोड़ों फूंकना रहा है, आज अदालत ने खुद उसकी असली सच्चाई पूरे पंजाब के सामने बेनकाब कर दी है।

भाजपा नेता ने याद दिलाया कि यह कोई नया मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में पंजाब सरकार ने खुद छठे वेतन आयोग की सिफारिश मानते हुए केंद्र सरकार के पैटर्न पर DA/DR देने को मंजूरी दी थी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया, जिस वजह से राज्य के कर्मचारी और पेंशनर, IAS-IPS-IFS और न्यायिक अधिकारियों के मुकाबले लगातार 16 प्रतिशत कम DA पाने को मजबूर रहे। चुग ने बताया कि बीते 8 अप्रैल को न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बरार की एकल पीठ ने सरकार की उम्र के आधार पर किश्तों में भुगतान वाली 'लिक्विडेशन प्लान' (18 फरवरी 2025) को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन और मनमाना करार देते हुए रद्द कर दिया था और 30 जून तक पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया था, और सरकार व PSPCL की उस आदेश के खिलाफ अपील को भी आज खंडपीठ ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

तरुण चुग ने आरोप लगाया कि जिस सरकार के पास अपने ही कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है, उसी सरकार ने निर्माण श्रमिक कल्याण कोष से रकम निकालकर 'मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना' (बजट प्रावधान Rs. 9,300 करोड़) में लगाने की कोशिश की, जिस पर भी हाईकोर्ट को रोक लगानी पड़ी। उन्होंने कहा कि मजदूरों के कल्याण के लिए बना पैसा भी इस सरकार ने अपनी चुनावी योजनाओं में झोंक दिया, जबकि पंजाब के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को जनवरी 2026 से यानी करीब 7 महीनों से वेतन नहीं मिला है, और मनरेगा मजदूर भी 5 से 8 महीनों से अपनी मेहनत की मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। चुग ने हाल ही में खन्ना में मनरेगा कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा कि इसने इस सरकार का असली, क्रूर चेहरा बेनकाब कर दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम भगवंत मान सरकार के कुशासन और वित्तीय कुप्रबंधन का जीता-जागता प्रमाण है, और जो सरकार अपने कर्मचारियों, शिक्षकों और मजदूरों को उनका हक तक नहीं दे पा रही, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। चुग ने भाजपा की ओर से पंजाब के हर सरकारी कर्मचारी और पेंशनर को पक्की गारंटी देते हुए कहा कि पंजाब में भाजपा सरकार बनते ही केंद्र सरकार की दर के बराबर DA और पेंशन का पूरा बकाया बिना किसी देरी के चुकाया जाएगा, और किसी भी कर्मचारी, शिक्षक या मजदूर का वेतन एक भी दिन लेट नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को अब यह तय करना है कि वे कर्ज में डूबी, कर्मचारी-विरोधी इस सरकार को कब तक बर्दाश्त करेंगे।

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