Edited By Kamini,Updated: 04 Aug, 2026 06:55 PM

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्य सभा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस "शिक्षा क्रांति" का प्रचार मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार पिछले साढ़े 4 वर्षों से कर रही है, उसकी...
पंजाब डेस्क : भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्य सभा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस "शिक्षा क्रांति" का प्रचार मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार पिछले साढ़े 4 वर्षों से कर रही है, उसकी वास्तविकता मान सरकार के अपने शिक्षा मंत्री ने पंजाब विधानसभा के भीतर उजागर कर दी है। चुघ ने कहा कि विधानसभा में दिए गए आधिकारिक उत्तर ने साबित कर दिया है कि आप सरकार का शिक्षा मॉडल केवल विज्ञापनों, होर्डिंगों और राजनीतिक प्रचार तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह विपरीत है।
चुघ ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने स्वीकार किया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में 31,370 अध्यापकों के पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर लगा एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। मास्टर कैडर, लेक्चरर कैडर, ईटीटी, हेड टीचर, सेंट्रल हेड टीचर और स्पेशल एजुकेटर समेत लगभग हर श्रेणी में हजारों पद खाली पड़े हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि राज्य के 1100 स्कूल ऐसे हैं जहां नेतृत्व देने के लिए प्रिंसिपल तक उपलब्ध नहीं हैं, क्या इन 1100 स्कूलों की जिम्मेदारी केजरीवाल लेंगे, क्या यही केजरीवाल मॉडल की सच्चाई है चुघ ने सवाल किया।
चुघ ने कहा कि जो सरकार स्वयं को देश का सबसे आधुनिक और सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मॉडल बताती है, वह पहले यह बताए कि जिन स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, वहां शिक्षा क्रांति आखिर किसके भरोसे लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल शिक्षा और विश्वस्तरीय सुविधाओं के सपने दिखाने वाली सरकार पहले यह जवाब दे कि कक्षाओं में पढ़ाने वाला शिक्षक कहां है। सच्चाई यह है कि आप सरकार ने शिक्षा सुधार को जनसेवा नहीं बल्कि प्रचार अभियान बना दिया है।
चुघ ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र की यह बदहाली उस समय और भी गंभीर हो जाती है जब दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में सामने आए हाईटेक नकल रैकेट का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले को "पेपर लीक नहीं, केवल नकल" बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा केंद्रों पर संगठित तरीके से तकनीकी माध्यमों से नकल करवाई जा रही है, तो यह केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।
चुघ ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि एक ओर भर्ती परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं और दूसरी ओर सरकार विधानसभा में यह दावा कर रही है कि पिछले साढ़े 4 वर्षों में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। चुघ ने कहा कि झूठे दावों से सच्चाई नहीं बदलती। पंजाब का युवा, बेरोजगार अभ्यर्थी और हर वह परिवार जिसने अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष किया है, वह इस वास्तविकता को भली-भांति समझता है। चुघ ने कहा कि शिक्षक संगठनों द्वारा भी लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि हजारों अध्यापकों को शिक्षण कार्यों के बजाय गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में लगाया गया है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर लौटे बच्चों और उनके अभिभावकों का भरोसा टूट रहा है और यही आप सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
चुघ ने कहा कि पंजाब के बच्चों, युवाओं और अभिभावकों के साथ किया गया यह विश्वासघात अब अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता। विधानसभा में रखे गए सरकारी आंकड़ों ने आप सरकार के दावों की परतें खोल दी हैं। अब सरकार को प्रचार और आत्मप्रशंसा छोड़कर जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। चुघ ने मांग की कि पंजाब सरकार तत्काल सभी रिक्त शिक्षक पदों को भरने के लिए समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करे। साथ ही फार्मेसी भर्ती परीक्षा से जुड़े पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब के बच्चों और युवाओं का भविष्य राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं बल्कि सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
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